Police urges for permission: जानबूझकर नहीं ली अनुमति, सौरभ दास और आशुतोष रांका ने नहीं माने नियम

नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। सीजेपी ने 20 जुलाई को दिल्
नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। सीजेपी ने 20 जुलाई को दिल्ली में 'संसद मार्च' का आह्वान किया था, जिसके लिए पार्टी के प्रवक्ताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका से बार-बार अनुमति लेने का आग्रह किया गया था। दिल्ली पुलिस ने उन्हें लिखित में अनुमति लेने के लिए कई बार संपर्क किया, लेकिन दोनों नेताओं ने पुलिस की बात को नजरअंदाज कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, देशभर से जुटी हजारों की भीड़ ने कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हुए संसद की ओर कूच किया। पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने जब प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, तो स्थिति गंभीर हो गई और हिंसक टकराव शुरू हो गया। प्रदर्शनकारियों ने रायसीना मार्ग पर लगे बैरिकेड को तोड़कर संसद भवन के मुख्य गेट के पास पहुंच गए। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संसद की आंतरिक सुरक्षा में तैनात कमांडो को मजबूरी में राइफल्स ताननी पड़ीं।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 16 से 19 जुलाई के बीच पुलिस ने हर दिन सौरभ दास और आशुतोष रांका से मिलकर उन्हें संसद मार्च के लिए लिखित आवेदन देने का दबाव बनाया। पुलिस ने उनसे मार्च के रूट, संसद जाने वाले रास्तों और शामिल होने वाले लोगों की संख्या के बारे में जानकारी मांगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि संसद सत्र के दौरान इस क्षेत्र में कई केंद्रीय मंत्रियों के आवास और संवेदनशील वीवीआईपी सुरक्षा घेरे हैं। बिना अनुमति संसद की ओर बढ़ने से आम जनता और सुरक्षा व्यवस्था दोनों के लिए बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है।
















