Supreme Court's Ruling on Environmental Clearance: पर्यावरण मंजूरी में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, विकास की गति पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार के 2021 के ऑफिस मेमोरेंडम को रद्द करते हुए बिना पूर्व पर्यावरण मंजूरी के शुरू हुई परियोजनाओं को पिछली तारीख से ग्रीन क्
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार के 2021 के ऑफिस मेमोरेंडम को रद्द करते हुए बिना पूर्व पर्यावरण मंजूरी के शुरू हुई परियोजनाओं को पिछली तारीख से ग्रीन क्लीयरेंस देने की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। यह निर्णय न केवल स्वागत योग्य है, बल्कि नैतिक दृष्टि से भी सही माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी नई परियोजना पर काम शुरू करने से पहले पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य होगी। इस फैसले का उद्देश्य उन प्रवृत्तियों पर रोक लगाना है, जो नियमों को हल्का बना देती हैं। अगर कोई प्रोजेक्ट शुरू कर दिया जाए और बाद में पर्यावरण अप्रूवल मिल ही जाएगा जैसी सोच नियमों को औपचारिकता भर बना देती है। यह प्रवृत्ति जरूरी पर्यावरण मानकों के उल्लंघन को बढ़ावा देती है और उस पर मुहर लगाने जैसी लगती है। इसलिए इसे रोकना किसी भी जिम्मेदार देश और समाज के लिए आवश्यक था।
पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया महज कागजी खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए। यह परियोजना के संभावित प्रभावों जैसे प्रदूषण, वनों का नुकसान, जल स्रोत और स्थानीय समुदायों का वैज्ञानिक अध्ययन सुनिश्चित करती है। बिना पूर्व मंजूरी के काम शुरू करने से ऐसा नुकसान हो सकता है, जिसे बाद में सुधारना या ठीक करना असंभव हो सकता है। इस फैसले से भविष्य की परियोजनाओं में जवाबदेही बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण का विचार मजबूत होगा। मौजूदा परियोजनाओं को प्रभावित न करने का प्रावधान भी व्यावहारिक है, जिससे अचानक आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।
















