Supreme Court Hearing on Data Protection Bill: डाटा प्रोटेक्शन बिल मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब अगले महीने होगी

डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और इसके अंतर्गत आने वाले डीपीडीपी रूल्स के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब अगले महीने होगी। केंद्र सर
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और इसके अंतर्गत आने वाले डीपीडीपी रूल्स के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब अगले महीने होगी। केंद्र सरकार ने इस मामले में कोर्ट से तीन हफ्ते का समय मांगा है ताकि वह अपने जवाब को दाखिल कर सके। यह मामला इस समय देश में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इससे नागरिकों के डेटा की सुरक्षा और उनकी गोपनीयता पर गहरा असर पड़ सकता है। याचिकाकर्ता की वकील वृंदा ग्रोवर ने सुनवाई के दौरान यह आरोप लगाया कि यह नया एक्ट सूचना के अधिकार (आरटीआई) में महत्वपूर्ण बदलाव करता है। उनके अनुसार, पहले से मौजूद सार्वजनिक जानकारी के लिए जो सुरक्षा उपाय थे, उन्हें हटा दिया गया है, जिससे सार्वजनिक हित पर खतरा मंडराने लगा है। उन्होंने यह भी कहा कि कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ, जिनका अधिकार नागरिकों को आर्टिकल 19 और 21 के तहत प्राप्त था, अब इस एक्ट के तहत बाहर कर दी गई हैं।
वकील प्रशांत भूषण ने भी इस एक्ट की आलोचना की और कहा कि नागरिकों का पब्लिक मुद्दों पर जानकारी प्राप्त करना एक वैधानिक अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि इस एक्ट के तहत किसी अधिकारी पर आरोपों की जानकारी भी नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी और राशन कार्ड जैसी जानकारियाँ भी अब केवल इस आधार पर नहीं दी जाएंगी कि यह व्यक्तिगत जानकारी है। यह स्थिति नागरिकों के लिए चिंताजनक है, क्योंकि इससे उनके अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। जस्टिस बागची ने इस मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की और कहा कि आरटीआई एक्ट का दायरा डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट से कहीं अधिक व्यापक है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें यह देखना होगा कि क्या ये दोनों कानून एक ही क्षेत्र में सही तरीके से काम कर रहे हैं।
















