Court denies bail to former IAS officer in paper leak case: पेपर लीक हत्या से भी बड़ा अपराध, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पूर्व IAS की जमानत ठुकराई

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बुधवार को सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज कर दी। यह फैसला राज्य सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बुधवार को सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज कर दी। यह फैसला राज्य सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोप में उनकी गिरफ्तारी के बाद आया है। 62 वर्षीय ध्रुव को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सितंबर 2021 में गिरफ्तार किया था। इस परीक्षा में उनके बेटे सुमित ध्रुव का चयन हुआ था, जिसे उनके साथ गिरफ्तार किया गया।
सीबीआई ने अदालत में कहा कि जीवन किशोर ध्रुव ने अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियों का उल्लंघन करते हुए गोपनीयता को भंग किया और अपने बेटे को परीक्षा के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए। सीबीआई के वकील वैभव गोवर्धन ने कहा कि यह मामला परीक्षा के संचालन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं से संबंधित है, जो सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया की अखंडता को खतरे में डालता है और हजारों उम्मीदवारों के विश्वास को प्रभावित करता है।
वहीं, किशोर ध्रुव ने अदालत में अपने बचाव में कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है क्योंकि वे पीएससी सचिव हैं। उनके वकील देवर्षि ठाकुर ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके नाम का उल्लेख मूल एफआईआर में नहीं था और जांच के दौरान जोड़ा गया।
ध्रुव ने तर्क किया कि उनके बेटे ने परीक्षा में भाग लिया और उन्होंने सभी गोपनीय कार्यों से खुद को दूर रखा था। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही एक सह-आरोपी को जमानत दे चुका है और उनका मामला समान स्तर पर है।
हालांकि, अदालत ने उनके तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि लाखों युवा उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना हत्या से भी अधिक गंभीर अपराध है। हाई कोर्ट ने कहा कि एक व्यक्ति की हत्या से केवल एक परिवार प्रभावित होता है, जबकि लाखों उम्मीदवारों का करियर बर्बाद हो जाता है। न्यायाधीश ने कहा कि आरोपियों पर लगाए गए आरोप सामान्य नहीं हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि जीवन किशोर ध्रुव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने बेटे को परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए। सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया है कि नीट (यूजी) पेपर लीक मामले में तीन विशेषज्ञों ने परीक्षा के सवालों को विभिन्न तरीकों से लीक किया। इस मामले में शामिल लोगों की गतिविधियों ने परीक्षा की पारदर्शिता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
















