Meta's 'Illegal Censorship' Increases in India: भारत में मेटा की 'अवैध सेंसरशिप' बढ़ी, एक्टिविस्ट टेलीग्राम की तरफ मुड़े
सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा (इंस्टाग्राम और फेसबुक) ने भारत में विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक सामग्री से जुड़े रील्स तथा पोस्ट्स पर अपनी सेंसरशिप को काफी ते
सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा (इंस्टाग्राम और फेसबुक) ने भारत में विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक सामग्री से जुड़े रील्स तथा पोस्ट्स पर अपनी सेंसरशिप को काफी तेज़ कर दिया है। राजनीतिक दलों, नेताओं और सामान्य प्रदर्शनकारियों की पोस्ट्स तेजी से इंस्टाग्राम से गायब हो रही हैं। इस संदर्भ में आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविन्द केजरीवाल और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने खुलकर आरोप लगाए हैं। मेटा की इस सेंसरशिप के कारण कई एक्टिविस्ट अब टेलीग्राम पर शिफ्ट हो रहे हैं और वहां अपना ब्रॉडकास्ट हब बना रहे हैं। प्रमुख प्रभावित अकाउंट्स में इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC), आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल, CJP के प्रवक्ता सौरव दास और न्यूज़ पोर्टल Scroll.in जैसे खातों की पोस्ट्स और रील्स भारत में ब्लॉक कर दी गई हैं। जंतर-मंतर पर पुलिस चेतावनियों का मजाक उड़ाती हुई स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की कार्यकर्ता सखी की एक वायरल रील, जिसे 1 करोड़ से अधिक बार देखा गया, को भी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल द्वारा सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी पर की गई आलोचनात्मक फेसबुक पोस्ट्स को भी प्रतिबंधित किया गया है। दूसरी ओर, बीजेपी और आरएसएस समर्थकों की साम्प्रदायिक और भड़काने वाले कंटेंट पर कोई रोक नहीं है। इंस्टाग्राम पर आरक्षण के विरोध में पोस्ट की भरमार है, जिस पर कोई रोक नहीं है। मेटा की अवैध सेंसरशिप का एक कारण हाल ही में हुए देशव्यापी युवा विरोध प्रदर्शनों को माना जा रहा है, जिसके बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया एल्गोरिदम एंटी-एस्टेब्लिशमेंट कंटेंट को ज्यादा बढ़ावा दे रहा है, हालांकि वास्तव में वह आपत्तिजनक कंटेंट का टर्म इस्तेमाल कर रही है। हाल ही में संसद की आईटी मामलों की स्थायी समिति, जिसके अध्यक्ष बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे हैं, ने मेटा के शीर्ष अधिकारियों को समन कर कड़ी फटकार लगाई थी। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक रील के कुछ घंटों के लिए गलती से हटने और एल्गोरिदम के पक्षपात को लेकर भी मेटा पर दबाव बढ़ाया गया। मेटा ने CJP के वीडियो को भी निशाना बनाया है। CJP के सह संयोजक और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि मेटा ने उनके चार वीडियो प्रतिबंधित कर दिए हैं। एक वीडियो में दिखाया गया था कि पुलिस जंतर-मंतर तक खाना पहुंचने से कैसे रोक रही थी। दूसरे वीडियो में सोनम वांगचुक को जबरन उठाया गया था। उन्होंने लिखा है, '@Meta मुझे पता है कि यह सरकार हमसे डरती है, लेकिन पिछली बार जब मैंने देखा था, तब आप अभी भी आज़ाद दुनिया की बातें कर रहे थे!'
भारत के सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर ने एक बयान में जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों के सोशल मीडिया अकाउंट पर मनमाने कंटेंट हटाने और अकाउंट प्रतिबंधित किए जाने की कार्रवाई पर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि मेटा ने AAP, उसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के इंस्टाग्राम अकाउंट पर प्रतिबंध लगाए। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित पोस्टों पर कार्रवाई प्लेटफॉर्म को मिले कानूनी अनुरोधों के आधार पर की गई। SFLC.in का कहना है कि कई मामलों में यूजर्स को यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती कि कंटेंट हटाने या अकाउंट प्रतिबंधित करने का कानूनी अथवा तथ्यात्मक आधार क्या है और वे इस फैसले को चुनौती कैसे दे सकते हैं। संगठन ने कहा कि इस तरह की अपारदर्शी मॉडरेशन व्यवस्था यूजर्स के लिए यह समझना मुश्किल बना देती है कि प्लेटफॉर्म की नीतियां किस आधार पर लागू की जा रही हैं। खासकर राजनीतिक अभिव्यक्ति, सरकार या सार्वजनिक अधिकारियों की आलोचना और शांतिपूर्ण विरोध से जुड़े कंटेंट पर ऐसी कार्रवाई लोकतांत्रिक विमर्श के लिए गंभीर चिंता का विषय है। SFLC.in ने सुप्रीम कोर्ट के Shreya Singhal v. Union of India फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत कंटेंट ब्लॉक करने के आदेश कारणयुक्त, आवश्यक और आनुपातिक होने चाहिए तथा उनके कारण लिखित रूप में दर्ज किए जाने चाहिए, ताकि न्यायिक समीक्षा संभव हो सके। SFLC.in ने इस कार्रवाई को कानून के शासन और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की प्रतिबद्धता के विपरीत बताया और कई मांगें रखीं। संगठन ने सभी कंटेंट हटाने के आदेशों को सार्वजनिक करने, उनके कानूनी आधार और कारण बताने, धारा 69A तथा 2009 के Blocking Rules में निर्धारित प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन करने और सोशल मीडिया कंपनियों को भेजे गए नोटिस की जानकारी प्रभावित यूजर्स को भी देने की मांग की। आमतौर पर सरकार आईटी अधिनियम की धारा 69A के तहत आधिकारिक टेकडाउन आदेश जारी करती है, जिसमें प्रक्रियात्मक सुरक्षा होती हैं। हालाँकि, गृह मंत्रालय के 'सहयोग पोर्टल' के जरिए सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 की धारा 79(3)(b) के तहत भी नोटिस भेजे जा रहे हैं। X (ट्विटर) ऐसे नोटिसों पर तुरंत कार्रवाई नहीं करता क्योंकि इनमें आपराधिक दायित्व नहीं होता, लेकिन मेटा स्वचालित रूप से तुरंत compliance कर लेता है और उस सामग्री को भी हटा देता है जिसके लिए वह कानूनी रूप से बाध्य भी नहीं है। मेटा (इंस्टाग्राम/फेसबुक) पर बढ़ती सेंसरशिप के चलते टेलीग्राम पर गतिविधियों में भारी उछाल देखा जा रहा है। इंस्टाग्राम और फेसबुक से हटाई जा रही रील्स, वीडियो क्लिप्स और पुलिस कार्रवाई के फुटेज को यूजर्स टेलीग्राम चैनलों और ग्रुप्स में तेजी से री-अपलोड कर रहे हैं। टेलीग्राम पर एल्गोरिदम आधारित रीच दबाने या स्वचालित टेकडाउन की व्यवस्था इंस्टाग्राम जैसी सख्त नहीं है। इसलिए छात्र संगठन, राजनीतिक कार्यकर्ता और स्वतंत्र पत्रकार टेलीग्राम को मुख्य सूचना प्रसार तंत्र बना रहे हैं। हटाए गए कंटेंट के Google Drive, Mega और टेलीग्राम इंटरनल मीडिया लिंक्स बड़े-बड़े ब्रॉडकास्ट चैनलों पर शेयर किए जा रहे हैं ताकि ब्लॉक की गई जानकारी आम जनता तक पहुंच सके। विभिन्न टेलीग्राम ग्रुप्स में मेटा की नीतियों और सरकार के दबाव की आलोचना हो रही है और यूज़र्स को अन्य विकेंद्रीकृत व एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट होने की अपील की जा रही है। प्रोटॉन वीपीएन के महाप्रबंधक डेविड पीटरसन ने सबसे पहले सार्वजनिक रूप से इसकी जानकारी दी कि टेलीग्राम पर रजिस्ट्रेशन बढ़ा है। एक्स पर पोस्ट में कंपनी के आंकड़ों का हवाला देते हुए पीटरसन ने कहा कि भारत से रोज़ाना रजिस्ट्रेशन में 120 फीसदी की वृद्धि हुई है। हालाँकि ये आंकड़ा जून-जुलाई का है। जून में मोदी सरकार ने कुछ समय के लिए टेलीग्राम पर भी प्रतिबंध लगाया था। ये आंकड़े एक ज़रूरी शुरुआती संकेत देते हैं, लेकिन ये केवल एक वीपीएन सर्विस प्रोवाइडर के रजिस्ट्रेशन को दर्शाते हैं, न कि पूरे भारतीय बाजार को। गूगल प्ले या एप्पल के ऐप स्टोर पर वीपीएन ऐप्स के दैनिक डाउनलोड की संख्या जानने का कोई सीधा सार्वजनिक तरीका नहीं है।
















