Fraud in Noida: 33 करोड़ की ठगी का खुलासा, 7 गिरफ्तार

नोएडा में एक बड़े साइबर ठगी के मामले का खुलासा हुआ है, जिसमें पुलिस ने एक गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बेरोजगारों के दस्तावेजों का उपयोग क
नोएडा में एक बड़े साइबर ठगी के मामले का खुलासा हुआ है, जिसमें पुलिस ने एक गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बेरोजगारों के दस्तावेजों का उपयोग करके फर्जी बैंक खाते खोलता था और इन खातों को साइबर ठगों को कमीशन पर बेचता था। पुलिस ने गढ़ी चौखंडी के एक होटल से इन आरोपियों को पकड़ा, जहां से उनके पास से सात मोबाइल फोन, एक चेकबुक, चार लेटरहेड और एक मोहर बरामद की गई। गिरोह के खिलाफ देशभर में 74 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें से 33 करोड़ रुपये की ठगी की गई है। पुलिस ने बताया कि इन फर्जी खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और एपीके फाइल भेजकर ठगी करने के लिए किया जाता था। इस मामले में मुख्य आरोपी राधे की तलाश जारी है, जो म्यूल खाता लेने और एपीके फाइल उपलब्ध कराने का काम करता था। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि के लोग शामिल हैं, जिनमें बीसीए, डीफार्मा, बीए-बीएससी और इंटरमीडिएट तक के छात्र हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लखनऊ, दिल्ली, मध्य प्रदेश, फर्रुखाबाद, कन्नौज और आगरा के रहने वालों के रूप में हुई है। इन सभी ने साइबर ठगी करने वाले गिरोह के साथ मिलकर काम किया। यह गिरोह इंटरनेट मीडिया के माध्यम से बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों से संपर्क करता था और उन्हें बैंक खाता खोलने के लिए एकमुश्त रकम देता था। इसके बाद इन लोगों के बैंक खातों का नियंत्रण साइबर ठगों को कमीशन पर दे दिया जाता था। इस प्रक्रिया में साइबर ठग डिजिटल अरेस्ट और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के जरिए ठगी की रकम को खपाते थे। इसके अलावा, गिरोह खुद भी एपीके फाइल भेजकर फंसे हुए लोगों से पैसे मंगवाता था। इस प्रकार, यह गिरोह अपने लाभ के लिए बेरोजगारों का शोषण कर रहा था।
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह के सदस्यों द्वारा डिंग एसएमएस नाम की एपीके फाइल का उपयोग किया जाता था, जिससे बैंक से आने वाले ओटीपी और संदेशों को ठगों को उपलब्ध कराया जाता था। इस प्रक्रिया से साइबर ठग आसानी से खातों से पैसे निकाल लेते थे। कुछ समय बाद, ये खाते बंद कर दिए जाते थे और ठगी की गई रकम को आपस में बांट लिया जाता था। थाना प्रभारी सुभाष चंद्र ने कहा कि आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। साथ ही, गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और तलाश की जा रही है।
















