Supreme Court denies Narayan Sai's plea against life sentence: सुप्रीम कोर्ट ने नारायण साईं की उम्रकैद पर रोक लगाने से किया इनकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 10 नवंबर 2023 को आसाराम के बेटे नारायण साईं को एक बड़ा झटका देते हुए 2013 के दुष्कर्म मामले में उसकी उम्रकैद की सजा को निल
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 10 नवंबर 2023 को आसाराम के बेटे नारायण साईं को एक बड़ा झटका देते हुए 2013 के दुष्कर्म मामले में उसकी उम्रकैद की सजा को निलंबित करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। अदालत ने गुजरात उच्च न्यायालय से उसकी लंबित आपराधिक अपील का यथासंभव तीन महीने के भीतर निस्तारण करने का आग्रह किया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि हम हाईकोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वह तीन महीने की अवधि के भीतर अपील का निपटारा करने का प्रयास करे। साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता और राज्य सरकार इसमें पूरा सहयोग करेंगे।
नारायण साईं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत को बताया कि उसने जल्द सुनवाई के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उसकी अपील पर अब तक सुनवाई शुरू नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने नारायण साईं को यह स्वतंत्रता भी दी कि यदि उसकी अपील का निपटारा तीन महीने के भीतर नहीं होता है, तो वह दोबारा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आ सकता है।
गुजरात उच्च न्यायालय ने 4 मई 2023 को नारायण साईं की याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए टिप्पणी की थी कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई आधार नजर नहीं आता कि आवेदक की बरी होने की संभावना हो। उल्लेखनीय है कि नारायण साईं 11 साल की जेल काट चुका है, लेकिन वह 2019 से अपनी मुख्य अपील पर सुनवाई में सहयोग करने के बजाय बार-बार जमानत अर्जियां दाखिल कर कार्यवाही में देरी करने की रणनीति अपना रहा है।
सूरत की एक अदालत ने अप्रैल 2019 में नारायण साईं को उसकी एक पूर्व महिला अनुयायी द्वारा दर्ज कराए गए 2013 के दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, उसके सहयोगियों धर्मिष्ठा उर्फ गंगा, भावना उर्फ यमुना और पवन उर्फ हनुमान को 10-10 साल की सजा सुनाई गई थी। यह भी ध्यान देने योग्य है कि नारायण साईं के पिता आसाराम भी दुष्कर्म के दो अलग-अलग मामलों में सजा काट रहे हैं।
















