Supreme Court's Remark to Mahua Moitra: 'Why Fear Eggs? Freedom Fighters Faced Bullets'
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने अंडे फेंके जाने की आशंका जताई, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि एक राजनेता को अंडे फेंके जाने का डर क्यों होना चाहिए, जबकि स्व
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने अंडे फेंके जाने की आशंका जताई, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि एक राजनेता को अंडे फेंके जाने का डर क्यों होना चाहिए, जबकि स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए सीने पर गोलियां खायी थीं। मोइत्रा ने धार्मिक भावनाएँ भड़काने के मामले में जांच अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति मांगी थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह अजीबोगरीब टिप्पणी की। अदालत ने उनकी याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया। दरअसल, यह पूरा मामला एक मुक़दमे से जुड़ा है जिसमें महुआ मोइत्रा के खिलाफ एक फेसबुक पोस्ट को लेकर धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला दर्ज किया गया है। जांच अधिकारी ने उन्हें पूछताछ के लिए उपस्थित होने का नोटिस दिया था। इससे पहले महुआ मोइत्रा ने कलकत्ता हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त तक चल रहा है, इसलिए वे 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश हो सकती हैं। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि उस दिन उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए और प्रदर्शनकारियों की ओर से किसी तरह का उत्पीड़न भी न हो। महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी। उन्होंने अदालत से मांग की कि उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति दी जाए। उनके वकील गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि कानून के तहत महिलाओं को उनके निवास स्थान के अलावा किसी अन्य जगह पर पूछताछ के लिए बुलाने पर विशेष सुरक्षा मिलती है। महुआ की ओर से कहा गया, 'पुलिस के नोटिस के मुताबिक मुझे अपने ही चुनाव क्षेत्र के पुलिस स्टेशन में हाज़िर होना है। पिछली बार जब मैं वहाँ गयी थी तो अंडे फेंकने जैसी धमकियाँ दी गईं और सचमुच अंडे फेंके गए।' सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने पूछा, 'वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही क्यों? सिर्फ इसलिए कि आप सांसद हैं?' जब महुआ ने अंडे फेंके जाने की आशंका का जिक्र किया तो अदालत ने कहा, 'राजनीति में आने के बाद आप अंडों से क्यों डरती हैं? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने तो सीने पर गोलियां खाई थीं।' न्यायमूर्ति दत्ता ने यह भी कहा कि ऐसा मामला सुप्रीम कोर्ट तक आना ही नहीं चाहिए था। महुआ मोइत्रा की याचिका वापस लेने के बाद अदालत ने उसे खारिज कर दिया। इसका मतलब है कि अब उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा। महुआ मोइत्रा की ओर से अदालत में कहा गया कि उनकी मांग किसी विशेष सुविधा के लिए नहीं थी, बल्कि सुरक्षा कारणों से थी। वकील ने कहा कि पहले भी उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे और उन पर अंडे फेंके गए थे। इसलिए उन्होंने केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूछताछ की अनुमति मांगी थी। अब महुआ मोइत्रा को कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का पालन करना होगा। उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होना होगा। हाईकोर्ट पहले ही यह सुनिश्चित कर चुका है कि उनकी पेशी के दौरान पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि उनके साथ किसी तरह का उत्पीड़न न हो और उनके खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई न की जाए, जब तक अदालत आगे कोई आदेश न दे।
















