Iran War Reveals US Military Shortcomings: अमेरिका के मिसाइल भंडार में कमी, उत्पादन में बढ़ोतरी की आवश्यकता

अमेरिका, जो दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति माना जाता है, ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण एक नई चुनौती का सामना किया है। इस युद्ध ने अमेरिकी सेना के महत्वपू
अमेरिका, जो दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति माना जाता है, ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण एक नई चुनौती का सामना किया है। इस युद्ध ने अमेरिकी सेना के महत्वपूर्ण मिसाइल भंडार में तेजी से कमी ला दी है, जिसे पुनः भरने में कई साल लग सकते हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग, पेंटागन, ने प्रमुख हथियार कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है।
डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी स्टीव फीनबर्ग ने कंपनियों को 21 दिन के भीतर अपनी उत्पादन और डिलीवरी की गति बढ़ाने की योजना प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। इस निर्देश का पालन करते हुए बोइंग, लॉकहीड मार्टिन और RTX जैसी कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने का दबाव डाला गया है। अमेरिका के अधिकांश हथियारों का वास्तविक स्टॉक सार्वजनिक नहीं किया जाता, जिससे स्थिति का सही आकलन करना मुश्किल हो जाता है।
CSIS के जुलाई आकलन के अनुसार, अमेरिकी पैट्रियट इंटरसेप्टर का भंडार 1,000 से नीचे आ चुका है। इसके बाद के आकलनों में यह संख्या 759 से 827 के बीच बताई गई है, जबकि युद्ध से पहले यह लगभग 2,330 थी। इस स्थिति के कारण स्टॉक में कम से कम 38% की कमी आई है। केवल एयर डिफेंस मिसाइलें ही नहीं, बल्कि आक्रामक मिसाइलों का भी भारी उपयोग किया गया है।
अप्रैल में CSIS ने बताया कि 39 दिनों की प्रारंभिक एयर और मिसाइल अभियान में सात प्रमुख हथियार प्रणालियों का अत्यधिक इस्तेमाल हुआ। वॉशिंगटन पोस्ट के विश्लेषण के अनुसार, शुरुआती चरण में अमेरिका ने 1,000 से अधिक टॉमहॉक मिसाइलें दागीं, जो कुल स्टॉक का लगभग एक-तिहाई है। JASSM का एक चौथाई स्टॉक भी युद्ध में खर्च हुआ। इस स्थिति को देखते हुए, पेंटागन ने कंपनियों को 21 दिन का अल्टीमेटम दिया है।
















