Coral Reefs at Risk: प्रवाल भित्तियों पर मंडरा रहा विलुप्ति का खतरा, इन पर निर्भर है करीब 50 करोड़ लोगों का जीवन

देश के तटीय और द्वीप क्षेत्रों में प्रवाल भित्तियों का संरक्षण और अध्ययन करने के लिए एक नया राष्ट्रीय प्रवाल भित्ति अनुसंधान संस्थान स्थापित किया जा रहा है। यह
देश के तटीय और द्वीप क्षेत्रों में प्रवाल भित्तियों का संरक्षण और अध्ययन करने के लिए एक नया राष्ट्रीय प्रवाल भित्ति अनुसंधान संस्थान स्थापित किया जा रहा है। यह संस्थान दक्षिणी अंडमान के चिड़ियाटापू में स्थापित होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रवाल भित्तियों की स्थिति का अध्ययन करना, उनकी निगरानी करना और उन्हें संरक्षित करना है। यह संस्थान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रवाल भित्तियाँ जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील मानी जाती हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने प्रवाल भित्तियों को समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों में सबसे संवेदनशील के रूप में वर्गीकृत किया है। इसके अलावा, यूनेस्को ने चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा उत्सर्जन की प्रवृत्ति जारी रही, तो इस सदी के अंत तक विश्व धरोहर सूची में शामिल सभी प्रवाल भित्तियाँ विलुप्त हो सकती हैं। यह स्थिति न केवल समुद्री जीवन के लिए बल्कि मानव जीवन के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर रही है।
प्रवाल भित्तियाँ समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और ये लगभग 50 करोड़ लोगों के जीवन और आजीविका पर निर्भर करती हैं। ये न केवल समुद्री जीवों के लिए आवास प्रदान करती हैं, बल्कि तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रवाल भित्तियों का क्षय तटीय समुदायों के लिए आर्थिक संकट का कारण बन सकता है, क्योंकि ये क्षेत्र पर्यटन, मछली पकड़ने और अन्य समुद्री संसाधनों पर निर्भर करते हैं। इसलिए, इस नए संस्थान की स्थापना एक सकारात्मक कदम है, जो प्रवाल भित्तियों के संरक्षण और उनके अध्ययन के लिए आवश्यक संसाधन और विशेषज्ञता प्रदान करेगा।



















