ICAR-IIAB Achieves Milestone: अरुणाचली याक का पहला संपूर्ण जीनोम किया तैयार

भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आइसीएआर-आइआइएबी) ने कृषि अनुसंधान और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है। रांची के
भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आइसीएआर-आइआइएबी) ने कृषि अनुसंधान और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है। रांची के नामकुम स्थित इस संस्थान ने महज पांच वर्षों में कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, जो न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी पहचान को मजबूत करती हैं। संस्थान ने विंग्ड बीन (चौसला सेम) का पहला संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण और अरुणाचली याक का पहला संपूर्ण जीनोम तैयार किया है, जो कृषि अनुसंधान में एक नई दिशा प्रदान करता है। इसके अलावा, आइआइएबी धान-5 नामक नई धान की किस्म को भी विकसित किया गया है, जिसे झारखंड सहित छह राज्यों में खेती के लिए अनुशंसित किया गया है। इस नई किस्म की बेहतर उत्पादन क्षमता के कारण, कई राज्यों के किसान इसका लाभ उठा रहे हैं।
संस्थान ने नैनो तकनीक के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। नैनो कण संश्लेषण मशीन के विकास से माइक्रो जिंक, कापर और यूरिया जैसे नैनो कणों का उत्पादन किया जा रहा है। यह न केवल नैनो आधारित कृषि उत्पादों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देगा, बल्कि उर्वरकों के अधिक प्रभावी उपयोग का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। इसके साथ ही, आईसीएआर-आईआईएबी ने ग्रामीण विकास में भी अपना योगदान दिया है। अब तक एक लाख से अधिक किसानों, ग्रामीण युवाओं और विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि और जैव प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण के दौरान उन्नत बीज और अन्य कृषि सामग्री भी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है।



















