CWG 2026: भिवानी की बेटियों ने ग्लासगो में जीते दो स्वर्ण पदक

भिवानी, हरियाणा। यह केवल स्वर्ण पदकों की कहानी नहीं है, बल्कि उस मिट्टी की पहचान है जिसने वर्षों से देश को मुक्केबाजी के चैंपियन दिए हैं। जब हरियाणा के भिवानी क
भिवानी, हरियाणा। यह केवल स्वर्ण पदकों की कहानी नहीं है, बल्कि उस मिट्टी की पहचान है जिसने वर्षों से देश को मुक्केबाजी के चैंपियन दिए हैं। जब हरियाणा के भिवानी की बेटियों ने ग्लासगो में राष्ट्रमंडल खेल 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगा लहराया, तो यह जीत सिर्फ जैस्मिन लंबोरिया और प्रीति साई पवार की नहीं थी, बल्कि पूरे 'मिनी क्यूबा' की पहचान और भारतीय मुक्केबाजी की समृद्ध विरासत की जीत बन गई। भिवानी की यह धरती, जो कभी कैप्टन हवा सिंह और विजेंद्र जैसे चैंपियनों की जन्मभूमि रही है, अब अपनी बेटियों के सुनहरे पंचों से नया इतिहास लिख रही है। यह संदेश भी दे रही है कि भिवानी की माटी आज भी चैंपियन गढ़ती है और देश को विश्व विजेता बनाने की क्षमता रखती है। इस बार बेटे सचिन सिवाच ने भी ग्लासगो में अपने मुक्कों का लोहा मनवाया।
भिवानी में मुक्केबाजी की मजबूत नींव कैप्टन हवा सिंह ने रखी थी, और हरियाणा गठन के बाद पहले ओलंपियन और अर्जुन अवार्डी भीम सिंह ने खेल संस्कृति को नई दिशा दी। वर्ष 2004 के एथेंस ओलंपिक से शुरू हुआ स्वर्णिम सफर अब नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है। पहले विजेंद्र सिंह, अखिल कुमार और जितेंद्र सीसर ने इस शहर को विश्व मानचित्र पर स्थापित किया, और अब जैस्मिन लंबोरिया, प्रीति पंवार, प्रिया घनघस, और साक्षी चौधरी जैसी बेटियां उसी विरासत को और ऊंचाई पर ले जा रही हैं। साक्षी चौधरी ढांडा और प्रिया घनघस एक ही गांव धनाना से हैं, जबकि जैस्मिन और प्रीति एक ही शहर से हैं।
















