Nitin Gadkari का बड़ा प्लान: 2028 से V2V सिस्टम सभी नए वाहनों के लिए अनिवार्य

केंद्र सरकार सड़क सुरक्षा को बढ़ाने और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम को विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने प्रस्ताव
केंद्र सरकार सड़क सुरक्षा को बढ़ाने और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम को विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने प्रस्तावित किया है कि 1 अक्टूबर 2028 से सभी नए दोपहिया, कार और कमर्शियल वाहनों में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्यूनिकेशन सिस्टम अनिवार्य होगा। इसके लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR), 1989 में संशोधन का मसौदा जारी किया गया है। मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर 30 दिनों तक सार्वजनिक सुझाव मांगे हैं, जिनकी समीक्षा के बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।
V2V सिस्टम को लागू करने की प्रक्रिया दो चरणों में होगी। पहले चरण में, 1 अक्टूबर 2027 से, यदि कोई वाहन निर्माता स्वेच्छा से V2V तकनीक उपलब्ध कराता है, तो उसे AIS-230 Standard का पालन करना होगा। दूसरे चरण में, 1 अक्टूबर 2028 से यह तकनीक सभी नई L, M और N कैटेगरी के वाहनों में अनिवार्य हो जाएगी। इन श्रेणियों में दोपहिया वाहन, पैसेंजर कार, एसयूवी, बस, ट्रक और अन्य कमर्शियल वाहन शामिल हैं।
सरकार ने V2V सिस्टम के लिए AIS-230 (ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड) तैयार किया है, जिसमें न्यूनतम तकनीकी मानक, सिस्टम की कार्यक्षमता, साइबर सिक्योरिटी, रेडियो परफॉर्मेंस, GNSS, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पैटिबिलिटी, पावर सप्लाई आवश्यकताएं और सड़क सुरक्षा प्रदर्शन जैसी आवश्यकताएं शामिल हैं। V2V तकनीक एक ऐसी प्रणाली है जो वाहनों को वायरलेस माध्यम से रियल-टाइम जानकारी साझा करने की अनुमति देती है।
हालांकि यह तकनीक सड़क सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं, जैसे विभिन्न कंपनियों के वाहनों के बीच निर्बाध कम्युनिकेशन सुनिश्चित करना, तकनीक का सफल इंटीग्रेशन, साइबर सिक्योरिटी को मजबूत करना, और सिस्टम की विश्वसनीयता बनाए रखना। पहले के अनुमानों के अनुसार, V2V के लिए लगाए जाने वाले ऑन बोर्ड यूनिट (OBU) की कीमत लगभग 5,000 से 7,000 रुपये तक हो सकती है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस वर्ष V2V तकनीक की घोषणा करते हुए कहा था कि इससे वाहन चालक एक-दूसरे से संवाद कर सकेंगे।



















