Global Toy Market: खिलौना के वैश्विक बाजार में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने की तैयारी, टास्क फोर्स का किया गठन

नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में खिलौनों के निर्यात और घरेलू उत्पादन में लगातार वृद्धि को देखते हुए, भारतीय सरकार ने अब वैश्विक स्तर पर
नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में खिलौनों के निर्यात और घरेलू उत्पादन में लगातार वृद्धि को देखते हुए, भारतीय सरकार ने अब वैश्विक स्तर पर भारतीय खिलौनों की हिस्सेदारी बढ़ाने का निर्णय लिया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने निर्देश दिया है कि वर्ष 2032 तक खिलौनों के वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी को 5 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया जाए। यह टास्क फोर्स खिलौना उद्योग को गुणवत्ता, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, उत्पाद डिजाइनिंग, निर्यात में वृद्धि, श्रम बल के विकास और वैल्यू चेन में बाधाओं को दूर करने में मदद करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात साल पहले घरेलू खिलौना उद्योग को प्रोत्साहित करने की बात की थी, जब भारतीय बाजार में बिकने वाले 60 प्रतिशत से अधिक खिलौने आयातित थे। हाल के वर्षों में आयात शुल्क में वृद्धि और गुणवत्ता नियमों के लागू होने के कारण खिलौनों के आयात में कमी आई है, जिससे भारत अब खिलौनों का निर्यातक बन गया है।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 में खिलौनों का आयात 37.17 करोड़ डॉलर का था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 23.23 करोड़ डॉलर रह गया है। इस दौरान खिलौनों के आयात में 37.5 प्रतिशत की गिरावट आई है। वहीं, भारत का खिलौना निर्यात 20.35 करोड़ डॉलर से बढ़कर 38.4 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है, जो कि 89 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। भारत के खिलौनों का निर्यात अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और नीदरलैंड जैसे देशों में हो रहा है। दूसरी ओर, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा जारी की गई खिलौनों की प्लेबुक के अनुसार, भारतीय खिलौना उद्योग की वार्षिक वृद्धि दर 10.1 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक खिलौना उद्योग की वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत है। इस आंकड़े के अनुसार, वर्ष 2047 तक भारत की वैश्विक खिलौना बाजार में हिस्सेदारी 4 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।



















