Sukma News: कागजों में बिना मंजूरी आधे पहाड़ पर चल गया बारूद

सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र के ग्राम पंचायत पेंटाचिमली के तुमलपाड़ में वन भूमि से अवैध खनन का मामला सामने आया है। आरोप है कि बीआरओ (बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन
सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र के ग्राम पंचायत पेंटाचिमली के तुमलपाड़ में वन भूमि से अवैध खनन का मामला सामने आया है। आरोप है कि बीआरओ (बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन) के प्रोजेक्ट हीरक के तहत सिलगेर से एलमागुंडा तक बन रही करीब 51 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण में वन क्षेत्र से बिना वैधानिक अनुमति बड़ी मात्रा में पत्थर निकाले गए और उनका उपयोग किया गया। जानकारी के अनुसार, वन परिक्षेत्र जगरगुंडा के पूवर्ती-1 डीपीएफ कक्ष क्रमांक 475 में लगभग एक हेक्टेयर वन भूमि पर खनन किए जाने का आरोप है। मामले की जानकारी मिलने पर हमारी टीम ने मौके का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा कैंप के पीछे स्थित एक पहाड़ी पर बड़े पैमाने पर ब्लास्टिंग और पत्थर निकालने का काम होता दिखाई दिया। स्थानीय लोगों का दावा है कि पहाड़ी का बड़ा हिस्सा काट दिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, यहां से निकाले गए बोल्डरों को हाइवा वाहनों के जरिए पास के दो क्रेशर प्लांट तक पहुंचाया जाता है। वहां इन्हें गिट्टी में बदलकर सड़क निर्माण कार्य में इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह काम कई महीनों से चल रहा है और इससे जुड़े निर्माण कार्य का ठेका रायपुर के एक ठेकेदार के पास है। खनिज विभाग की अनुमति पर सवाल मामले के सामने आने के बाद खनिज विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि खनन की कोई वैधानिक अनुमति जारी नहीं की गई थी, तो इतने लंबे समय तक भारी मशीनों और वाहनों से खनन कैसे चलता रहा। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर अवैध रूप से निकाले गए खनिज का आकलन करने और शासन को हुए संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है। इस संबंध में प्रभारी खनिज अधिकारी छबिनेश्वर मौर्य ने कहा कि विभाग की ओर से इस क्षेत्र में खनन की कोई अनुमति जारी नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि मामला विभाग के संज्ञान में है और उच्च अधिकारियों के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग की निगरानी पर भी सवाल यह मामला वन भूमि से जुड़ा है, इसलिए वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि संरक्षित वन क्षेत्र में लंबे समय तक खनन और ब्लास्टिंग होती रही, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अब यह सवाल उठ रहा है कि संबंधित विभागों को इसकी जानकारी थी या नहीं, और यदि थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई। ब्लास्टिंग की वैधता की भी जांच की मांग स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि खनन की अनुमति नहीं थी, तो वन क्षेत्र में ब्लास्टिंग किस आधार पर की गई। नियमानुसार खनन और विस्फोटकों के उपयोग के लिए संबंधित विभागों से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। ऐसे में पूरे मामले में खनन अनुमति, ब्लास्टिंग की वैधता और संबंधित विभागों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। कांग्रेस ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरीश कवासी ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के लिए ग्राम सभा के माध्यम से ग्रामीणों से सहमति ली गई थी और बदले में गांव में विकास कार्य कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक वादे पूरे नहीं किए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिना आवश्यक अनुमति के कई महीनों से वन भूमि पर खनन किया जा रहा है। हरीश कवासी ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों, ठेकेदारों और संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

















