Education System Under Scrutiny: स्कूलों में बच्चों के भोजन की गुणवत्ता पर सवाल

सरकार ने स्कूलों में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उनकी सेहत का ध्यान रखना था। लेकिन कई विद्यालयों में यह व्य
सरकार ने स्कूलों में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उनकी सेहत का ध्यान रखना था। लेकिन कई विद्यालयों में यह व्यवस्था औपचारिकता बनकर रह गई है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के सीतापुर और बलिया में दो मामले सामने आए हैं, जहां बच्चों को भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। सीतापुर के महमूदाबाद में प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को पनिहल सब्जी और रोटी फेंककर दी गई, जबकि बलिया के पलिया गांव में रोटी और सब्जी बच्चों के हाथ में दिए जाने का मामला सामने आया। इन दोनों घटनाओं के बाद संबंधित प्रधानाध्यापिकाओं को निलंबित कर दिया गया है।
हालांकि, सवाल यह उठता है कि विद्यालयों में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए विभागीय निगरानी तंत्र क्यों निष्क्रिय है? यदि बच्चों को सम्मानजनक तरीके से अच्छा भोजन नहीं मिल रहा है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? देशभर में मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत घटिया खाद्यान्न का इस्तेमाल और भ्रष्टाचार की खबरें अक्सर आती रहती हैं। शिक्षकों और रसोइयों की मिलीभगत से बच्चों को पौष्टिक भोजन के बजाय खराब गुणवत्ता का भोजन परोसा जाता है।


















