Uttarakhand High Court's Ruling: उत्तराखंड हाईकोर्ट का UKPSC को बड़ा झटका, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर अहम फैसला

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है, जिसमें न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने उत्तराखंड लो
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है, जिसमें न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) द्वारा सहायक प्रोफेसर (रसायन) के पद के लिए नीलम आर्य और सुमन लता पाल के आवेदन को निरस्त करने के आदेश को खारिज कर दिया। इस मामले में आयोग ने पहले नीलम को दो बार अपात्र घोषित किया था, लेकिन तीसरी बार उन्हें पात्र करार दिया गया था। न्यायालय ने आयोग के इस निर्णय को अनुचित मानते हुए याचिकाकर्ताओं को एक लाख रुपये का व्यय चार सप्ताह के भीतर देने का आदेश दिया है। यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब डॉ. आर्य की कृषि रसायन में पीएचडी को पद के लिए अनुपयुक्त माना गया, जबकि उनके पास एमएससी की डिग्री भी थी।
राज्य लोक सेवा आयोग ने तर्क दिया कि पीएचडी रसायन शास्त्र में होनी चाहिए, लेकिन न तो नौकरी के विज्ञापन में और न ही मानक यूजीसी नियमों में ऐसी कोई शर्त थी। यूजीसी के अनुसार, पीएचडी को 2009 या 2016 के दिशानिर्देशों के अनुसार होना चाहिए, लेकिन विषय के संबंध में कोई विशेष प्रतिबंध नहीं है। एकलपीठ ने आयोग की व्याख्या पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि योग्यता विज्ञापन में बताई गई शर्तों के अनुसार होनी चाहिए। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि चयन प्रक्रिया के दौरान मुख्य योग्यताओं में बदलाव करना सरकारी नौकरी में निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्रभावित करता है।



















