Chandipura Virus Outbreak: गुजरात में 22 बच्चों की मौत का कारण

गुजरात में चांदीपुरा वायरस के कारण अब तक 22 बच्चों की जान जा चुकी है। यह वायरस बारिश के मौसम में अधिक सक्रिय होता है और इसके संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे है
गुजरात में चांदीपुरा वायरस के कारण अब तक 22 बच्चों की जान जा चुकी है। यह वायरस बारिश के मौसम में अधिक सक्रिय होता है और इसके संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। चांदीपुरा वायरस का नाम महाराष्ट्र के चांडीपुरा शहर के नाम पर रखा गया है, जहां इसकी पहचान सबसे पहले 1965 में हुई थी। यह एक वायरल संक्रमण है, जिसके लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और दौरे शामिल हैं। इस वायरस के संक्रमण से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे कि निमोनिया, एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) और एन्सेफलाइटिस। यदि समय पर इसके लक्षणों की पहचान नहीं की जाती है, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि चांदीपुरा वायरस ज़ूनोटिक है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। इसके संक्रमण का मुख्य कारण सैंडफ्लाई, टिक्स और मच्छर हैं, जो बारिश के मौसम में अधिक सक्रिय होते हैं। विशेष रूप से 14 साल तक के बच्चों में इस वायरस के मामले अधिक देखने को मिलते हैं।
दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. एल.एच. घोटेकर ने बताया कि चांदीपुरा वायरस का संक्रमण धीरे-धीरे बढ़ता है। शुरुआत में तेज खांसी और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण सामने आते हैं। यदि इन लक्षणों की पहचान समय पर नहीं की जाती है, तो यह स्थिति गंभीर हो सकती है। डॉ. घोटेकर ने चेतावनी दी है कि इस वायरस के फैलने की संभावना उन क्षेत्रों में अधिक होती है, जहां सैंडफ्लाई और मच्छर मौजूद होते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि अन्य राज्यों में भी इस वायरस के संक्रमण से बचाव के उपाय किए जाएं।



















