Drug Control Department's Reality Check: दिल्ली में मेडिकल स्टोरों की अनियमितताएँ

दिल्ली के ड्रग कंट्रोल विभाग की कार्रवाई की सच्चाई अब सामने आ रही है। विभाग द्वारा लाइसेंस रद्द किए जाने के बावजूद कई मेडिकल स्टोरों का संचालन नए नामों से जारी
दिल्ली के ड्रग कंट्रोल विभाग की कार्रवाई की सच्चाई अब सामने आ रही है। विभाग द्वारा लाइसेंस रद्द किए जाने के बावजूद कई मेडिकल स्टोरों का संचालन नए नामों से जारी है। पिछले पांच वर्षों में, ड्रग्स नियंत्रण विभाग ने 173 मेडिकल स्टोरों पर कार्रवाई की है, जिनमें नशीली दवाओं की बिक्री और दवा का रिकॉर्ड न रखने जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। लेकिन यह जांच करने पर पता चला है कि अधिकांश स्टोर फिर से नए नाम से खुल चुके हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या विभाग की कार्रवाई वास्तविक है या केवल दिखावा। दैनिक जागरण संवाददाता ने इस मामले की गहराई से पड़ताल की और पाया कि जिन मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस रद्द किए गए थे, वे अब नए नामों से संचालित हो रहे हैं। उदाहरण के लिए, झिलमिल स्थित सुपर मेडिकोज का लाइसेंस 12 जून को रद्द किया गया था, लेकिन यह अब शर्मा मेडिकोज के नाम से चल रहा है। इसी तरह, कृष्णा नगर का वामिका मेडिकल स्टोर भी नए स्थान पर फिर से खुल गया है।
इस प्रकार की अनियमितताओं के चलते, ड्रग कंट्रोल विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। घोंडा स्थित भावना मेडिकल स्टोर का लाइसेंस भी रद्द किया गया था, लेकिन यह अभी भी उसी नाम से संचालित हो रहा है। दिलशाद गार्डन में इहबास नामक मेडिकल स्टोर पर भी कार्रवाई की गई थी, लेकिन अब इसका नाम संजीवनी इहबास रखा गया है। इस तरह की घटनाएँ दर्शाती हैं कि ड्रग माफिया किस तरह से कानून का फायदा उठाकर अपनी गतिविधियों को जारी रख रहे हैं। द्वारका सेक्टर-10 में जन सेवा दवा बाजार पर भी छापेमारी की गई थी, लेकिन अब यह दवा बाजार नाम से चल रहा है।


















