Rising Snakebite Cases in Kushinagar: कुशीनगर में 30 दिन के अंदर सर्पदंश के 492 शिकार, नौ की गई जान

कुशीनगर में बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। पिछले 30 दिनों में मेडिकल कॉलेज में सर्पदंश के 492 मरीज भर्ती हुए हैं, जिनमें से नौ लोगों क
कुशीनगर में बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। पिछले 30 दिनों में मेडिकल कॉलेज में सर्पदंश के 492 मरीज भर्ती हुए हैं, जिनमें से नौ लोगों की जान चली गई है। चिकित्सकों का कहना है कि झाड़-फूंक और घरेलू उपचार में विलंब के कारण कई मरीजों को समय पर चिकित्सा नहीं मिल पाई। इस दौरान सर्पदंश के शिकार लोगों में ठाढ़ीभार की सरिता देवी, खिरकिया के 25 वर्षीय राजा हुसेैन, जंगल नाहर छपरा के 55 वर्षीय नरेश गोंड और अन्य शामिल हैं। अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन सहित आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं, और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में मरीजों का उपचार चल रहा है। डाक्टरों का कहना है कि सर्पदंश के बाद शुरुआती एक से दो घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इमरजेंसी इंचार्ज पुष्कर पाठक ने बताया कि 21 जून से 20 जुलाई तक 492 सर्पदंश के शिकार आए, जिनके उपचार में कुल 2300 एएसवी खर्च हुए। चिकित्सकों ने लोगों को सलाह दी है कि घबराने की बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचें। सर्पदंश की घटना होने पर प्रभावित अंग को अनावश्यक रूप से न काटें और न ही कसकर बांधें। मरीज को शांत रखते हुए जल्द से जल्द नजदीकी सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज पहुंचाएं। समय पर उपचार मिलने से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। अंगुली और पैर में काटने पर लगभग दो घंटे के भीतर उपचार शुरू हो जाना चाहिए। इस दौरान सांप काटने वाले स्थान से थोड़ा ऊपर किसी कपड़े से हल्का बांधें और मरीज को हिलाएं-डुलाएं नहीं, बल्कि आराम से लिटा दें।
सर्पदंश के कारण होने वाली समस्याओं में आंखों का धुंधला दिखाई देना, उल्टी, पेट दर्द और काटने वाले स्थान पर असहनीय दर्द शामिल हैं। इसके अलावा, आवाज में बदलाव और मुंह से लार निकलने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। वरिष्ठ फिजिशियन डा. उपेंद्र चौधरी ने बताया कि सर्पदंश के शिकार लोग अक्सर भयभीत हो जाते हैं, जिससे उन्हें घबराहट, बेचैनी, चक्कर और झनझनाहट महसूस होती है। कई बार सदमे के कारण हार्ट अटैक भी हो सकता है। इसलिए, चिकित्सकों ने सलाह दी है कि सर्पदंश के मामले में तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में उपचार कराना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिदिन आने वाले सर्पदंश के लगभग 90 प्रतिशत मामलों में सर्प जहरीले नहीं होते हैं। यदि समय पर एंटी स्नैक वेनम इंजेक्शन का डोज दिया जाता है, तो जान बचाई जा सकती है।



















