Leopard Jerry dies in Kanpur Zoo: चिड़ियाघर में मादा तेंदुआ जेरी की सेप्टीसीमिया से मौत

कानपुर के चिड़ियाघर में मादा तेंदुआ जेरी की मौत हो गई है। जेरी की उम्र साढ़े सात वर्ष थी और उसे अपनी पूंछ काटने की आदत थी, जिसके कारण उसके शरीर में संक्रमण फैल
कानपुर के चिड़ियाघर में मादा तेंदुआ जेरी की मौत हो गई है। जेरी की उम्र साढ़े सात वर्ष थी और उसे अपनी पूंछ काटने की आदत थी, जिसके कारण उसके शरीर में संक्रमण फैल गया था। वन्यजीव चिकित्सकों के पैनल ने शनिवार को उसका पोस्टमार्टम किया, जिसमें सेप्टीसीमिया को मौत का कारण बताया गया। जेरी के शरीर पर कई जगह काटने के निशान मिले थे, जो उसकी इस आदत का परिणाम थे। लंबे समय से उसका इलाज चल रहा था, लेकिन संक्रमण के कारण उसकी स्थिति बिगड़ गई और अंततः उसकी मौत हो गई। उसके ऊतकों को जांच के लिए बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान भेजा गया है।
जेरी को वर्ष 2019 में बिजनौर से शावक के रूप में रेस्क्यू कर कानपुर चिड़ियाघर लाया गया था। वन्यजीव चिकित्सकों ने उसे बोतल से दूध पिलाकर पाला था। जेरी को स्टीरियोटाइपिक बिहेवियर नामक बीमारी हो गई थी, जिसमें जानवर एक ही प्रक्रिया को बार-बार दोहराते हैं। इसी बीमारी के कारण वह बार-बार अपनी पूंछ काटती थी। चिड़ियाघर के निदेशक डा. कन्हैया पटेल ने बताया कि जेरी ने अप्रैल में अपनी पूंछ काटी थी और उसके बाद से उसका इलाज जारी था।
इसी बीच, बिजनौर के अमानगढ़ टाइगर रिजर्व से इलाज के लिए आ रही एक बाघिन की भी रास्ते में ही मौत हो गई। यह बाघिन 15 वर्ष की थी और उसकी मौत का कारण वृद्ध होना बताया गया है। बाघिन का पोस्टमार्टम भी किया गया है और उसके ऊतकों को जांच के लिए बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान भेजा गया है। चिड़ियाघर के निदेशक ने बताया कि बाघिन चिड़ियाघर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ चुकी थी। वन विभाग ने उसे नदी के किनारे से रेस्क्यू कर पकड़ा था, लेकिन वह इलाज के लिए पहुंचने से पहले ही रास्ते में मर गई।



















