Microplastics Found in Yamuna Fish: यमुना की मछलियों में मिले माइक्रोप्लास्टिक, स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण के कारण माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा में लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले वर्ष द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्य
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण के कारण माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा में लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले वर्ष द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) द्वारा किए गए अध्ययन में यह तथ्य सामने आया था कि यमुना में मौजूद मछलियों में माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए गए हैं। हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के शोधकर्ताओं ने भी यमुना में मिलने वाली मछलियों पर अध्ययन किया, जिसमें इस बात की पुष्टि हुई है कि यहाँ की मछलियाँ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं। अध्ययन में पाया गया कि हरियाणा की तुलना में दिल्ली में यमुना में मछलियों में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा अधिक है। यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि ऐसे मछली खाने से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे हार्मोनल असंतुलन, पाचन तंत्र में सूजन और कोशिकीय क्षति। प्लास्टिक पर चिपके जहरीले रसायन शरीर में पहुंचकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
टेरी के शोधकर्ताओं ने वर्ष 2024-25 में विभिन्न मौसमों में दिल्ली के विभिन्न स्थानों से नमूने लेकर उनकी जांच की थी। रिपोर्ट के अनुसार, यमुना जल में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा मौसम के अनुसार बदलती रहती है। मानसून के दौरान, जब पानी का बहाव बढ़ता है, तब माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा अधिक होती है। मानसून के बाद, यह मात्रा कम हो जाती है, क्योंकि यह गंदगी और प्लास्टिक आसपास की मिट्टी में फैल जाती है। दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने भी हरियाणा और दिल्ली में चार स्थानों पर यमुना में मिलने वाली मछलियों पर अध्ययन किया है। इस अध्ययन में हरियाणा के यमुनानगर और करनाल, तथा दिल्ली के सूर घाट और सोनिया विहार में 12 प्रजातियों की कुल 220 मछलियों का विश्लेषण किया गया।


















