Research breakthrough in cancer treatment: भुई आंवला के पौधे के अंदर छिपा कैंसर से लड़ने का राज

चंडीगढ़ से प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से हर घंटे औसतन 95 से 100 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। इस भयंकर बीमारी के इलाज के लिए नई दव
चंडीगढ़ से प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से हर घंटे औसतन 95 से 100 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। इस भयंकर बीमारी के इलाज के लिए नई दवा की खोज में जुटे वैज्ञानिकों को पंजाब यूनिवर्सिटी के शोध से एक नई उम्मीद मिली है। पीयू के शोधकर्ताओं ने भुई आंवला के पौधे में पाए जाने वाले एक बैक्टीरिया से एक प्राकृतिक अणु खोजा है, जो कैंसर के इलाज में सहायक हो सकता है। लैब में किए गए परीक्षणों में इस अणु ने एक्यूट टी-सेल ल्यूकेमिया की कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने की प्रक्रिया को शुरू करने में प्रभाव दिखाया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह प्राकृतिक स्रोत से प्राप्त अणु भविष्य में कैंसर की नई दवा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, इसे अभी कैंसर के मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इसके लिए और अधिक शोध और क्लीनिकल ट्रायल की आवश्यकता है। यह शोध पीयू के माइक्रोबियल बायोटेक्नोलाजी विभाग के प्रो. रोहित शर्मा, बायोटेक्नोलॉजी विभाग की डा. मोनिका शर्मा और पूर्व शोधार्थी डा. श्रुति नागरथ द्वारा किया गया है। उनके शोध को 'एक्सप्लोरिंग द एंटी-कैंसर एफिकेसी आफ एंडोफाइटिक बैसिलस सेफेंसिस-डिराइव्ड रैम्नोलिपिड आन एक्यूट टी-सेल ल्यूकेमिया सेल्स' शीर्षक से पेटेंट भी मिला है।
इस शोध में वैज्ञानिकों ने भुई आंवला के पौधे के अंदर प्राकृतिक रूप से रहने वाले एक बैक्टीरिया से बायोसर्फेक्टेंट नामक पदार्थ निकाला, जिसे बाद में अलग कर शुद्ध किया गया। इसके गुणों की जांच के दौरान जब इसे एक्यूट टी-सेल ल्यूकेमिया की कैंसर कोशिकाओं पर प्रयोग किया गया, तो इसमें कैंसर कोशिकाओं के नष्ट होने की प्रक्रिया को बढ़ाने की क्षमता दिखाई दी। शोध में यह भी पाया गया कि यह प्राकृतिक अणु कुछ खास कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने की प्रक्रिया को सक्रिय कर सकता है। यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे भविष्य में कैंसर के इलाज के लिए संभावित उपयोगी अणु मान रहे हैं।


















