Startup that once made solar panel cleaning robots: 90 दिन में बना दिया वेंटिलेटर

2020 की शुरुआत तक, नोक्का रोबोटिक्स का अस्पतालों से कोई संबंध नहीं था। आईआईटी कानपुर की यह स्टार्टअप कंपनी ऐसे रोबोट बनाती थी, जो बिना पानी का इस्तेमाल किए सोलर
2020 की शुरुआत तक, नोक्का रोबोटिक्स का अस्पतालों से कोई संबंध नहीं था। आईआईटी कानपुर की यह स्टार्टअप कंपनी ऐसे रोबोट बनाती थी, जो बिना पानी का इस्तेमाल किए सोलर पैनलों की सफाई करते थे। यह तकनीक भारत में तेजी से बढ़ रहे सौर ऊर्जा क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की गई थी। लेकिन जब भारत में वेंटिलेटर की कमी का संकट गहराया, तो निखिल कुरेले और हर्षित राठौर ने अपने पुराने काम से हटकर वेंटिलेटर बनाने का साहसिक निर्णय लिया। महज 90 दिनों में उन्होंने एक उच्च स्तरीय आईसीयू वेंटिलेटर का निर्माण किया, जिसका उपयोग देशभर के अस्पतालों में किया गया। यह कहानी न केवल उनके साहस की है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे एक स्टार्टअप ने संकट के समय में अपनी दिशा बदलकर समाज की सेवा की।
निखिल कुरेले का सफर मध्य प्रदेश के शहडोल से शुरू हुआ। वह खुद को एक सामान्य छात्र मानते थे, लेकिन गणित में उनकी प्रतिभा अद्वितीय थी। कक्षा 10 में 96% अंक प्राप्त करने के बाद, उन्हें इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कोटा भेजा गया। उन्होंने 2012 में आईआईटी कानपुर में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया और कॉलेज के दौरान रोबोटिक्स क्लब से जुड़े। वहीं, हर्षित राठौर ने केंद्रीय विद्यालय से पढ़ाई की और 2016 में आईआईटी कानपुर से केमिस्ट्री में ग्रेजुएट किया। दोनों ने 2017 में नोक्का रोबोटिक्स की स्थापना की, जहां उन्होंने बिना पानी के सोलर पैनलों की सफाई करने वाले रोबोट का निर्माण किया। हालांकि, कोविड-19 महामारी ने उनके व्यवसाय को एक नया मोड़ दिया।



















