Tragic Health Crisis in Tribal Areas: डूंगरपुर में 72.6% महिलाएं एनीमिया से ग्रसित

बांसवाड़ा-डूंगरपुर के सांसद राजकुमार रोत ने हाल ही में लोकसभा में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया, जो आदिवासी क्षेत्रों में मातृ स्वास्थ्य की चिंताजनक स्थिति को उजाग
बांसवाड़ा-डूंगरपुर के सांसद राजकुमार रोत ने हाल ही में लोकसभा में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया, जो आदिवासी क्षेत्रों में मातृ स्वास्थ्य की चिंताजनक स्थिति को उजागर करता है। केंद्र सरकार द्वारा दिए गए जवाब ने यह स्पष्ट किया है कि डूंगरपुर जिले में 15 से 49 वर्ष की आयु की 72.6% महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। यह आंकड़ा राजस्थान राज्य के औसत 54.4% से कहीं अधिक है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। इसके अलावा, राज्य में आदिवासी समुदाय की महिलाओं में एनीमिया की दर 61.6% है, जो कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का संकेत है। इस स्थिति ने न केवल स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को उजागर किया है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर कितनी अधिक जागरूकता और संसाधनों की आवश्यकता है।
इस समस्या के समाधान के लिए सांसद राजकुमार रोत ने सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बढ़ाने और एनीमिया के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विशेष कार्यक्रमों की आवश्यकता है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को आदिवासी क्षेत्रों में पोषण कार्यक्रमों को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि महिलाओं को स्वस्थ जीवन जीने के लिए आवश्यक पोषण मिल सके। इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए उन्होंने यह भी बताया कि एनीमिया केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के समग्र विकास और उनके परिवारों की भलाई पर भी गहरा प्रभाव डालता है।



















