Separatist Leader Joins Mainstream Politics: बिलाल गनी लोन ने हंदवाड़ा में रैली कर पिता की विरासत पर दावा किया

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। पूर्व हुर्रियत कान्फ्रेंस नेता बिलाल गनी लोन ने रविवार को उत्तर कश्मीर के हंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की एक रैली आयोजित की
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। पूर्व हुर्रियत कान्फ्रेंस नेता बिलाल गनी लोन ने रविवार को उत्तर कश्मीर के हंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की एक रैली आयोजित की, जिसमें उन्होंने मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल होने का संकेत दिया। इस रैली के माध्यम से, उन्होंने अपने दिवंगत पिता अब्दुल गनी लोन की राजनीतिक विरासत पर भी अपना दावा पेश किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिलाल लोन का यह कदम लोन परिवार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है। इसके साथ ही, यह उनके छोटे भाई सज्जाद गनी लोन, जो पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और हंदवाड़ा के विधायक हैं, के लिए एक राजनीतिक चुनौती भी उत्पन्न कर सकता है। कुपवाड़ा जिले के दर्द हरि गांव में आयोजित इस रैली में बोलते हुए, बिलाल लोन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं और नई वास्तविकताओं के अनुसार आगे बढ़ना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि बदलते हालात का मतलब यह नहीं है कि लोगों के हितों की रक्षा के प्रयासों को छोड़ दिया जाए। उन्होंने अपने पिता की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पिता जनता के सच्चे नेता थे, जिन्होंने अपने सिद्धांतों और मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि आज उनके पिता की विरासत को धूमिल किया जा रहा है और वह ऐसा नहीं होने देंगे।
बिलाल लोन ने यह भी कहा कि यदि उनका उद्देश्य जनता के व्यापक हित हैं, तो राजनीतिक बदलावों को संदेह या उपहास की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने विभिन्न विचारधाराओं के नेताओं से अपील की कि वे मतभेद भुलाकर जम्मू-कश्मीर के भविष्य के लिए एक साझा रोडमैप तैयार करें। उनका कहना था कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है, बल्कि समाज के हर जिम्मेदार व्यक्ति की इस प्रक्रिया में भूमिका होनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जी सकें। अपने संबोधन में, बिलाल लोन ने अप्रत्यक्ष रूप से अपने भाई सज्जाद लोन पर निशाना साधते हुए कहा कि डराने, अपशब्दों और विभाजनकारी राजनीति से केवल जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन नेताओं का असली उद्देश्य समाज को मजबूत बनाना और लोगों के भविष्य को बेहतर बनाना होना चाहिए।
















