Datia by-election signals: ग्वालियर-चंबल में बसपा की जगह ले सकती है आसपा

राज्य ब्यूरो, भोपाल। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में दलित राजनीति का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इस क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का प्रभाव कभी काफी मजबूत था,
राज्य ब्यूरो, भोपाल। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में दलित राजनीति का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इस क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का प्रभाव कभी काफी मजबूत था, लेकिन अब यह स्थान आजाद समाज पार्टी (आसपा) द्वारा भरा जा सकता है। दतिया उपचुनाव ने इस बात का संकेत दिया है कि आसपा आगामी विधानसभा चुनावों में बसपा के समान प्रभाव डाल सकती है। उपचुनाव में आसपा के प्रत्याशी दामोदर यादव ने 22,527 वोट प्राप्त किए, जो कि कुल वोटों का 14.3 प्रतिशत है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि दामोदर यादव ने न केवल बसपा और कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाई है, बल्कि भाजपा को भी प्रभावित किया है।
इस उपचुनाव में भाजपा को 6,016 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। दलित और ओबीसी (यादव) वोटों के इस नए समीकरण ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दामोदर यादव ने जो त्रिकोणीय मुकाबला खड़ा किया है, उसने मुख्य रूप से सत्ता विरोधी वोटों को आकर्षित किया है। यदि दामोदर को मिले वोटों का एक छोटा हिस्सा भी भाजपा के पाले में जाता, तो परिणाम भिन्न हो सकता था। दामोदर यादव के मजबूत प्रदर्शन को भाजपा की हार का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
दामोदर यादव ने इस बात की पुष्टि की है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने अंतिम समय में रणनीतिक भ्रम फैलाकर उनके समर्थकों के वोट कांग्रेस की ओर मोड़ दिए। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि भाजपा के नाराज कार्यकर्ताओं ने भी दामोदर यादव को समर्थन दिया। दूसरी ओर, भाजपा ने यह दावा किया है कि भले ही पार्टी उपचुनाव हार गई हो, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार दतिया में लगभग 1,700 वोट अधिक मिले हैं। दतिया उपचुनाव ग्वालियर-चंबल की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि वर्ष 2028 के चुनाव में दलित वोट पाना एक चुनौती होगी। 2018 के विधानसभा चुनाव में दलित मतदाताओं ने एकतरफा रुख अपनाकर पूरे क्षेत्र का राजनीतिक परिदृश्य बदल दिया था, जिसके परिणामस्वरूप भाजपा को सत्ता से बाहर होना पड़ा और कांग्रेस की सरकार बनी।
















