Meta in Trouble: दिगंबर जैन मुनियों की पोस्ट डिलीट करने पर आयोग ने की कार्रवाई

नई दिल्ली से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने मेटा प्लेटफॉर्म से हस्तक्षेप की मांग की है। यह मांग दिगंबर जैन संतों की तस्वीरें और वीडियो हटा
नई दिल्ली से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने मेटा प्लेटफॉर्म से हस्तक्षेप की मांग की है। यह मांग दिगंबर जैन संतों की तस्वीरें और वीडियो हटाए जाने के आरोपों के संदर्भ में की गई है। आयोग का आरोप है कि मेटा ने दिगंबर जैन मुनियों के पारंपरिक धार्मिक स्वरूप को अश्लीलता के तहत वर्गीकृत करते हुए उनकी पोस्ट्स को हटा दिया है। इसके अलावा, कई अकाउंट्स पर प्रतिबंध भी लगाया गया है, जिससे धार्मिक आस्था को ठेस पहुंची है। आयोग ने मेटा से अनुरोध किया है कि वह इस मामले में तत्काल नीति में बदलाव करे। आयोग के अध्यक्ष निर्मल जैन ने मेटा को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि दिगंबर जैन मुनियों का नग्न स्वरूप किसी प्रकार के प्रदर्शन का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हजारों वर्ष पुरानी आध्यात्मिक परंपरा, पूर्ण त्याग और तपस्या का प्रतीक है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद-25 के तहत संरक्षित धार्मिक स्वतंत्रता का हिस्सा है। ऐसे में इसे अश्लीलता मानकर कार्रवाई करना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।
आयोग ने मेटा से यह भी मांग की है कि धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए कंटेंट माडरेशन की स्पष्ट नीति बनाई जाए। दिगंबर जैन संतों के धार्मिक स्वरूप को अश्लीलता की श्रेणी से अलग रखा जाए और केवल ऐसी तस्वीरें या वीडियो साझा करने के कारण ब्लॉक किए गए श्रद्धालुओं और संस्थाओं के अकाउंट की समीक्षा कर उन्हें बहाल किया जाए। इसके साथ ही, आयोग ने यह भी कहा है कि दिगंबर जैन संतों के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां करने वालों पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आयोग का मानना है कि तकनीकी प्लेटफॉर्म को भारतीय धार्मिक परंपराओं के प्रति अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि किसी समुदाय की आस्था अनजाने में भी प्रभावित न हो।
इस मामले में मेटा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मेटा इस मुद्दे को कैसे संबोधित करेगा। आयोग ने मेटा के साथ संवाद स्थापित करने की कोशिश की है, ताकि धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जा सके। इस घटना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं के प्रति जागरूकता की आवश्यकता को भी उजागर किया है। आयोग ने मेटा से यह अपेक्षा की है कि वह अपनी नीतियों में बदलाव लाए और धार्मिक आस्था का सम्मान करे।
















