Delay in Technology Acquisition: वायुसेना प्रमुख अमरप्रीत सिंह ने क्यों कही ये बात?

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने हाल ही में 'भारत ड्रोन और रोबोटिक्स मंथन 3.0' और एसआईडीएम (सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स) के सम्मेलन
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने हाल ही में 'भारत ड्रोन और रोबोटिक्स मंथन 3.0' और एसआईडीएम (सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स) के सम्मेलन में महत्वपूर्ण बयान दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य के युद्धों में बढ़त बनाए रखने के लिए भारत को ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि 'देरी से मिली तकनीक, वास्तव में न मिलने के बराबर है।' इस संदर्भ में उन्होंने कागजी प्रस्तावों और वीडियो प्रस्तुतियों की बजाय वास्तविकता पर जोर दिया। वायुसेना प्रमुख ने बताया कि इस सुस्ती को तोड़ने के लिए वायुसेना ने सितंबर में 'ड्रोनाथन 2026' की घोषणा की है, जिसमें कंपनियां अपने उत्पादों का लाइव प्रदर्शन करेंगी। इसके साथ ही, 'एयरोस्पेस डिजाइन निदेशालय' को स्टार्ट-अप और नवोन्मेषकों के साथ संवाद के लिए एक सशक्त सेतु के रूप में स्थापित किया गया है।
एयर चीफ मार्शल ने कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र की रूपरेखा भारत की डिजाइन लैब्स और स्टार्टअप हब में पहले ही तैयार की जा रही है, लेकिन आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'हर एक पुर्जा भारत में ही विकसित होना चाहिए, तभी हम सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर कहलाएंगे।' सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ड्रोन निर्माण में उपयोग होने वाले हर घटक और तकनीक का स्वदेशी होना आवश्यक है। अन्यथा, विदेशी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता देश को कमजोर कर सकती है।
















