Jind News: गुरु पूर्णिमा पर जयंती देवी मंदिर में हवन-पूजन, कन्याओं का किया सम्मान

जींद। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को जयंती देवी मंदिर में श्रद्धा और आस्था के साथ विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्
जींद। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को जयंती देवी मंदिर में श्रद्धा और आस्था के साथ विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन, कन्या पूजन और मां जयंती के अभिषेक का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया और परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने विधिवत हवन संपन्न कराया। इसके बाद कन्या पूजन किया गया, जिसमें कन्याओं का सम्मान किया गया और उन्हें प्रसाद वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धा के साथ हवन में आहुतियां अर्पित कीं, जिससे विश्व कल्याण और परिवार की मंगलकामना की गई। हवन के उपरांत मां जयंती देवी का विशेष अभिषेक किया गया, जिसके बाद भक्तों ने दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन किए गए धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा के साथ ही श्रावण मास का शुभारंभ भी हो गया है, जिसे भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। उन्होंने बताया कि श्रावण मास के दौरान जयंती देवी मंदिर में प्रतिदिन सुबह 6:30 बजे भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाएगा। इस अनुष्ठान में श्रद्धालु जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भोलेनाथ का अभिषेक करेंगे। मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर रुद्राभिषेक एवं पूजा-अर्चना में भाग लेने का आह्वान किया है। इसके लिए मंदिर में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं भी पूरी कर ली गई हैं। इस प्रकार, गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने एकत्रित होकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर अपने-अपने परिवारों के लिए सुख-समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया। मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ देखने को मिली, जो इस अवसर पर एकत्रित हुए थे। सभी ने मिलकर इस पर्व को धूमधाम से मनाया और एक-दूसरे के साथ प्रसाद का वितरण किया। इस प्रकार, जयंती देवी मंदिर में गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन न केवल धार्मिक था, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक बना।
















