Transporters protest against fuel price hike: पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर हाहाकार, ट्रांसपोर्टरों का विरोध प्रदर्शन

पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और नए पेट्रोलियम लेवी के खिलाफ गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है। माल ढुलाई से जुड़े ट्रांसपोर्टरों ने देशभर में अनिश्चि
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और नए पेट्रोलियम लेवी के खिलाफ गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है। माल ढुलाई से जुड़े ट्रांसपोर्टरों ने देशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। वर्तमान में, पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 459 रुपये और डीजल 520.35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है। प्रदर्शनकारी सरकार की आर्थिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।
पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि का कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े आपूर्ति संकट को बताया जा रहा है। अप्रैल में पेट्रोल की कीमत 459 रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, जबकि डीजल की कीमत 520.35 रुपये प्रति लीटर हो गई थी। डीजल की कीमत में वृद्धि से सामान की ढुलाई की लागत भी बढ़ गई है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
पेट्रोलियम लेवी के खिलाफ जमात-ए-इस्लामी ने भी विरोध प्रदर्शन किए हैं। कराची, लाहौर, पेशावर, क्वेटा, इस्लामाबाद, रावलपिंडी और एबटाबाद जैसे शहरों में रैलियां और धरने आयोजित किए गए हैं। पार्टी प्रमुख हाफिज नईमुर रहमान ने सरकार से पेट्रोलियम लेवी वापस लेने और ईंधन की कीमतें कम करने की मांग की है। उन्होंने सरकार के इस तर्क को खारिज किया कि लेवी में कटौती आईएमएफ की प्रतिबद्धताओं के खिलाफ जाएगी।
यदि ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल लंबी चलती है, तो इसका असर केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रक और ट्रेलर खाद्य पदार्थ, उपभोक्ता सामान और औद्योगिक कच्चा माल पहुंचाते हैं, जबकि तेल टैंकर ईंधन की सप्लाई करते हैं। इनकी गतिविधियों में रुकावट से सामान की आवाजाही में देरी और परिवहन लागत में वृद्धि हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप, बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
पाकिस्तान की आर्थिक नीतियां आईएमएफ के साथ हुए समझौतों से जुड़ी हैं। सरकार का कहना है कि राजस्व बढ़ाने के लिए कुछ उपाय आवश्यक हैं। इसी कारण पेट्रोलियम लेवी का मुद्दा महत्वपूर्ण बन गया है। अब सरकार और ट्रांसपोर्ट प्रतिनिधियों के बीच सोमवार को बातचीत होने वाली है। यदि बातचीत सफल होती है, तो माल ढुलाई फिर से शुरू हो सकती है, लेकिन यदि गतिरोध जारी रहता है, तो इसका असर ईंधन, खाद्य आपूर्ति और खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है।
















