Raid in Narela: दिल्ली के नरेला में एफडीए की बड़ी छापामारी, 50 कार्टन एलोपैथिक दवाएं जब्त

गुरुग्राम के साइबर सिटी में बीपी की नकली दवा की खेप मिलने के बाद जांच का दायरा अब बड़े नेटवर्क तक पहुंच गया है। इस सिलसिले में गुरुग्राम खाद्य एवं औषधि प्रशासन
गुरुग्राम के साइबर सिटी में बीपी की नकली दवा की खेप मिलने के बाद जांच का दायरा अब बड़े नेटवर्क तक पहुंच गया है। इस सिलसिले में गुरुग्राम खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) और दिल्ली ड्रग विभाग की संयुक्त टीम ने दिल्ली के नरेला स्थित मां मनसा देवी अपार्टमेंट में छापेमारी की। इस छापेमारी के दौरान करीब 50 कार्टन एलोपैथिक दवाएं जब्त की गईं, जिनमें बड़ी मात्रा में नकली दवाएं शामिल हैं। जब्त की गई दवाओं के नमूने आगे की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। एफडीए के सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी मुख्य आरोपितों से मिली जानकारी के आधार पर की गई। जब टीम नरेला स्थित फ्लैट पर पहुंची, तो वहां मुख्य आरोपित सप्लायर साहिब अग्रवाल मौजूद नहीं थे। फ्लैट में एक महिला ने बताया कि वह पिछले छह वर्षों से साहिब अग्रवाल के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही है। महिला की मौजूदगी में दवाओं को जब्त किया गया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया।
गुरुग्राम के सुभाष नगर स्थित एक मेडिकल स्टोर से बीपी की नकली दवा मिलने के बाद एफडीए ने इस मामले में कार्रवाई शुरू की थी। इस मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपित सुब्रत द्विवेदी और सह-आरोपित जुबैर से रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। इन सुरागों के आधार पर दिल्ली में यह संयुक्त छापेमारी की गई। दोनों आरोपितों को पूछताछ के बाद अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भोंडसी जेल भेज दिया है। एफडीए अधिकारियों के अनुसार, आरोपित सुप्रत का भाई अभी तक जांच में शामिल नहीं हुआ है। उसने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए कुछ समय मांगा था, लेकिन अब उसे दोबारा नोटिस जारी कर जांच में शामिल होने के निर्देश दिए जाएंगे।
नकली दवाओं के इस नेटवर्क की कड़ियां लगातार जुड़ती जा रही हैं। यह दिल्ली में नकली दवाओं के खिलाफ की गई दूसरी बड़ी कार्रवाई है। नरेला में छापेमारी के बाद जांच अभी जारी है और आरोपितों से पूछताछ के बाद कई अन्य ठिकाने भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े खुलासे होने की संभावना है। इस प्रकार की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि नकली दवाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और जांच एजेंसियां इस मामले में पूरी गंभीरता से कार्य कर रही हैं।
















