Who was the garbage collector? The true identity revealed: कचरा उठाने वाला वह भिखारी कौन था? उसकी असली पहचान सामने आते ही उड़ गए होश

हिमालय की गोद में बसा एक खूबसूरत पहाड़ी स्थल, जहां देवदार के पेड़ हवा से बातें कर रहे थे और एक छोटी-सी नदी कल-कल करके बह रही थी। प्रकृति अपने पूर्ण श्रृंगार में
हिमालय की गोद में बसा एक खूबसूरत पहाड़ी स्थल, जहां देवदार के पेड़ हवा से बातें कर रहे थे और एक छोटी-सी नदी कल-कल करके बह रही थी। प्रकृति अपने पूर्ण श्रृंगार में थी। तभी तीन एसयूवी गाड़ियां धूल उड़ाती हुई वहां आकर रुकीं। गाड़ियों से उतरा शहरी रईसों का एक समूह। सबसे आगे थे रजत मल्होत्रा-एक बड़े कारोबारी, विदेश से एमबीए किए हुए, अकड़ से भरपूर। उनके साथ उनके दो दोस्त, उनकी पत्नियां और ढेर सारा सामान। तान्या (रजत की पत्नी) ने नाक सिकोड़ते हुए कहा, "यार, यहां तो ठीक से बैठने की जगह भी नहीं है। मैं तो कहती थी स्विट्जरलैंड चलो, पर नहीं, तुम्हें तो देसी पहाड़ देखने थे।"
दोस्त रोहन ने ठहाका लगाते हुए कहा, "अरे भाई, गरीबों का स्विट्जरलैंड समझो इसे। मजे करो।" सब लोग प्लास्टिक की कुर्सियां डालकर बैठ गए। देखते ही देखते बर्गर के रैपर, कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतलें और चिप्स के पैकेट चारों तरफ बिखरने लगे। रजत ने एक खाली बोतल उठाई और नदी की तरफ फेंकते हुए हंसा, "यहां कोई निगम नहीं है सफाई करने वाला, कूड़ा तो यहीं जाएगा।"
इतने में एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति वहां से गुजरा। मटमैले से कपड़े, सिर पर एक पुरानी टोपी, हाथ में एक बोरा और एक डंडा। वह शांत भाव से रास्ते में पड़े प्लास्टिक के कचरे को अपने बोरे में डालता जा रहा था। उसे देखकर रोहन की पत्नी शालिनी ने कुलबुलाते हुए कहा, "हे भगवान, यहां तो भिखारी भी पहाड़ की चोटी पर मिलते हैं। कितना गंदा लग रहा है।"
रजत ने मुंह बनाकर आवाज लगाई, "ओ बाबा! इधर आना।" वह व्यक्ति धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ा। चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी, न कोई गुस्सा, न कोई लालच। रजत ने अपनी जेब से पांच सौ का एक नोट निकाला और उस व्यक्ति की तरफ लहराते हुए दोस्तों से अंग्रेजी में बोला, "देखो, अब ये कैसे दौड़ता है।" उस व्यक्ति ने नोट लेने के बजाय झुक कर रजत की कुर्सी के पास पड़ा खाली जूस का डिब्बा उठाया और अपने बोरे में डाल लिया। फिर धीरे से बोला, "मैं पैसे नहीं लेता साहब, बस आपसे अनुरोध है कि अपना कचरा कूड़ेदान में डालें या अपने साथ वापस ले जाएं। यह हमारी धरती है।"
















