14 Years in Jail, Verdict Reversed: MP High Court Acquits Two Innocents in Murder Case

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में दमोह स्थित विशेष सत्र न्यायालय के 29 जून 2012 के फैसले को पलटते हुए तुलसीराम राजपाल और हरप्रसाद को हत्या के मामले में बर
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में दमोह स्थित विशेष सत्र न्यायालय के 29 जून 2012 के फैसले को पलटते हुए तुलसीराम राजपाल और हरप्रसाद को हत्या के मामले में बरी कर दिया। अदालत ने अभियोजन पक्ष के मामले में गंभीर खामियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि एफआईआर एक अज्ञात पुलिस अधिकारी द्वारा लिखी गई थी, जिसका बयान कभी दर्ज नहीं किया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 25 अगस्त 2009 की रात को प्यारेलाल गडरिया ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी उनके घर में घुस आए, उन्हें अपशब्द कहे और उन पर हमला किया। अभियोजन ने दावा किया कि तुलसीराम ने प्यारेलाल के पेट में चाकू से वार किया, जबकि हरप्रसाद और एक अन्य आरोपी ने उन्हें पकड़ रखा था। इस घटना के बाद प्यारेलाल की मृत्यु हो गई। अभियोजन ने मुकदमे के दौरान 15 गवाहों से पूछताछ की।
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कहा कि निचली अदालत का निर्णय सावधानीपूर्वक नहीं लिखा गया था और इस आधार पर इसे रद्द किया जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि दस्तावेज़ दाखिल न करने से बचाव पक्ष के तर्क को विश्वसनीयता मिली है कि प्यारेलाल ने एफआईआर दर्ज नहीं कराई थी। अदालत ने डॉक्टर की गवाही को भी महत्वपूर्ण माना, जिसमें कहा गया था कि प्यारेलाल को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था।
इस मामले में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत की लापरवाही और अभियोजन पक्ष की खामियों के चलते यह निर्णय लिया गया। इस फैसले ने दो निर्दोष लोगों को 14 साल की जेल से मुक्त किया है।

















