Investigation Report on Sambhal Violence: संभल हिंसा पर जांच रिपोर्ट में पूर्व नियोजित षड्यंत्र का खुलासा

संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा को पूर्व नियोजित बताने वाली न्यायिक आयोग की रिपोर्ट ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा किया है। रिपोर्ट में जामा मस्जिद इंतजा
संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा को पूर्व नियोजित बताने वाली न्यायिक आयोग की रिपोर्ट ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा किया है। रिपोर्ट में जामा मस्जिद इंतजामिया समिति के अध्यक्ष जफर अली, सांसद जियाउर्रहमान बर्क, सुहेल इकबाल, कासिम जमाल और मशहूद अली फारुकी जैसे नेताओं के बयान को संदिग्ध माना गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि भीड़ केवल सर्वे के कारण इकट्ठा हुई थी, लेकिन जफर अली और अन्य नेताओं ने लाउडस्पीकर के माध्यम से उत्तेजक नारेबाजी कर भीड़ को भड़काया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जफर अली ने मस्जिद की छत से भीड़ को इशारा किया, जो कि हिंसा की ओर संकेत करता है। इसके अलावा, वजूखाने का पानी निकलने को हिंसा का कारण बताने वाली बात को भी रिपोर्ट ने खारिज कर दिया है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 19 नवंबर को सर्वे में बाधा डालने, एडवोकेट कमिश्नर रमेश सिंह राघव पर दबाव बनाने और 21 नवंबर को वाट्सएप संदेशों के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को जामा मस्जिद बुलाने की घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि यह हिंसा एक पूर्व नियोजित षड्यंत्र का परिणाम थी। आयोग ने यह भी बताया कि 22 नवंबर को सांसद का उत्तेजक भाषण भी इस हिंसा को भड़काने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया। रिपोर्ट में जफर अली द्वारा गुटखा मंगाने के बहाने मस्जिद से बाहर जाने की बात को भी संदिग्ध माना गया, क्योंकि उस समय आसपास की दुकानें बंद थीं।
















