Slow Motion on 59 Thousand Jobs: सीएस ने 13 आईएएस अधिकारियों से मांगा हिसाब, सरकार ने कहा- जल्दी ज्वाइन कराओ

राजस्थान सरकार की 59 हजार सरकारी भर्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक मंथन का आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 4 लाख नौकरियों का संकल्प लिया ह
राजस्थान सरकार की 59 हजार सरकारी भर्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक मंथन का आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 4 लाख नौकरियों का संकल्प लिया है, जिसे समय पर पूरा करने के लिए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने 13 विभागों के आईएएस अधिकारियों से भर्ती प्रक्रियाओं की प्रगति रिपोर्ट मांगी। इस समीक्षा बैठक में अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत की गई जानकारी चौंकाने वाली रही, क्योंकि एक भी भर्ती फाइनल स्टेज तक नहीं पहुंची थी। यह स्थिति सरकार के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि वह जल्दी से जल्दी इन भर्तियों को अंतिम रूप देकर युवाओं को रोजगार देने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहती है। पिछले महीने प्रधानमंत्री द्वारा 54 हजार नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे, और अब सरकार की नजर नई 59 हजार भर्तियों पर है।
बैठक के दौरान जब मुख्य सचिव ने पूछा कि जिन पदों पर भर्ती होनी है, क्या उनकी वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है, परीक्षाएं कब होंगी और परिणाम कब जारी होंगे, तो अधिकांश अधिकारियों ने कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई। सभी का जवाब था कि "प्रक्रिया जारी है।" यह स्थिति दर्शाती है कि भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की आवश्यकता है, ताकि सरकार अपने वादे के अनुसार युवाओं को रोजगार देने में सफल हो सके। मुख्य सचिव ने जिन प्रमुख भर्तियों की रिपोर्ट मांगी, उनमें सफाई कर्मचारी, कनिष्ठ सहायक, पुलिस कांस्टेबल, शिक्षण सहयोगी, ग्राम विकास अधिकारी, जूनियर टेक्निकल सुपरवाइजर, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल, आयुष विभाग, कृषि पर्यवेक्षक, पशु चिकित्सा अधिकारी, सहायक अभियंता और जूनियर अभियंता जैसी महत्वपूर्ण भर्तियां शामिल हैं।
सरकार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, शिक्षक ग्रेड-III, संस्कृत शिक्षा विभाग, पुस्तकालयाध्यक्ष, जेल प्रहरी, एनएचएम और बस परिचालक जैसी अंतिम चरण में पहुंची भर्ती प्रक्रियाओं को भी तेज करने के लिए प्रयासरत है। दस्तावेज सत्यापन, परिणाम घोषणा और नियुक्ति आदेश जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पात्र अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नौकरी मिल सके। यह सभी प्रयास इस बात का संकेत हैं कि सरकार नौकरी के अवसरों को बढ़ाने के लिए गंभीर है और वह युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तत्पर है।
















