Warning Against Attacks on Ships: होर्मुज में जहाजों-नाविकों पर न हों हमले, जयशंकर ने अराघची को चेताया

नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ फोन पर बातचीत की। इस बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से
नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ फोन पर बातचीत की। इस बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी परिस्थिति में कारोबारी जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। जयशंकर ने यह जानकारी अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर साझा की। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से बातचीत और कूटनीति के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालने का पक्षधर रहा है। यह बयान उस समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता जा रहा है और भारत ने इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया है।
जयशंकर ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य आक्रामकता की निंदा की, जिसमें नौसैनिक नाकाबंदी और ईरान के वाणिज्यिक जहाजों पर हमले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी गतिविधियाँ क्षेत्र में असुरक्षा का मुख्य कारण बन रही हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे आक्रामक पक्षों को जवाबदेह ठहराने के लिए आगे आएं। जयशंकर ने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इसका प्रभाव अन्य देशों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने भारत की ओर से तनाव कम करने के लिए तत्परता को भी रेखांकित किया।
इस बातचीत में जयशंकर ने ईरान के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग और संवाद से ही क्षेत्र में स्थिरता लाई जा सकती है। भारत ने हमेशा से ही ईरान के साथ अपने संबंधों को महत्वपूर्ण माना है और इस क्षेत्र में शांति के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का प्रयास किया है। जयशंकर के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत किसी भी प्रकार की सैन्य आक्रामकता का समर्थन नहीं करता है और वह हमेशा शांति और संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान चाहता है।
















