Impact of Ken-Betwa Project: पन्ना से सतना की ओर बढ़े बाघों के कदम, बरौधा रेंज में शावकों संग सक्रिय दिखी बाघिन

शिवम कृष्ण त्रिपाठी, सतना। बुंदेलखंड की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना से मध्य प्रदेश के जंगलों में वन्य जीवों के आवास और प्राकृतिक गलियारों में बदलाव आ
शिवम कृष्ण त्रिपाठी, सतना। बुंदेलखंड की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना से मध्य प्रदेश के जंगलों में वन्य जीवों के आवास और प्राकृतिक गलियारों में बदलाव आ रहा है। इस नदी जोड़ो परियोजना के तहत वनों की कटाई शुरू होने के कारण बाघ नए और सुरक्षित क्षेत्रों की तलाश में निकल पड़े हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व से आगे सतना वनमंडल के बरौंधा रेंज में बाघों की गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है। यहां एक बाघिन अपने दो से तीन वर्ष के शावक के साथ जबारिन घाटी के आसपास देखी गई है। यह जानकारी वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा पुष्टि की गई है, जो इस क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। बरौंधा का यह क्षेत्र पन्ना और संजय टाइगर रिजर्व के बीच महत्वपूर्ण वन कॉरिडोर माना जाता है, जिससे वन्य जीव विशेषज्ञों का मानना है कि बरौंधा नए टाइगर-स्पॉट के रूप में पहचान बना सकता है।
वन विभाग के अधिकारी और विशेषज्ञ लगातार बरौंधा क्षेत्र में बाघों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। उनका मानना है कि यदि वर्तमान बाघिन बरौंधा को स्थायी ठिकाना बनाती है, तो सतना वनमंडल के इस क्षेत्र में भी सरभंगा वनक्षेत्र की तरह बाघों की नई पीढ़ी बस सकती है। कुछ वर्ष पहले सरभंगा में पन्ना से पहुंची बाघिन ने यहां ठिकाना बनाया था, जिसके बाद यहां 20 से अधिक बाघों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वर्ष 2015 में पन्ना टाइगर रिजर्व से बाघिन पी-213 ने मझगवां के सरभंगा पहुंचकर नर बाघ के साथ मिलकर अपना कुनबा बढ़ाया। इस बाघिन ने कई बार शावकों को जन्म दिया है, जिससे बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है।



















