El Nino's Impact on Monsoon: मानसून पर एल-नीनो का बढ़ा दबाव, सितंबर तक IOD पॉजिटिव नहीं हुआ तो बढ़ सकता है सूखे का खतरा

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। इस वर्ष मानसून के दूसरे चरण पर सबसे बड़ा दबाव एल-नीनो का देखा जा रहा है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि अगस्त और सितंबर के महीने इस सं
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। इस वर्ष मानसून के दूसरे चरण पर सबसे बड़ा दबाव एल-नीनो का देखा जा रहा है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि अगस्त और सितंबर के महीने इस संदर्भ में निर्णायक साबित हो सकते हैं। प्रशांत महासागर में एल-नीनो के लगातार मजबूत होने से भारत के विभिन्न हिस्सों में सूखे की आशंका बढ़ गई है। इस स्थिति को लेकर मौसम विभाग की नजर अब हिंद महासागर में विकसित होने वाले इंडियन ओशन डायपोल (आईओडी) पर है। वर्तमान में आईओडी न्यूट्रल स्थिति में है, लेकिन सितंबर में इसके पॉजिटिव होने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह एल-नीनो की चपेट में आए मानसून को नई ऊर्जा प्रदान कर सकता है। मौसम विभाग (आईएमडी) के मानसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (एमएमसीएफएस) के अनुसार, आने वाले दिनों में एल-नीनो की ताकत और बढ़ सकती है, जिससे मानसून कमजोर हो सकता है। इससे हवाओं की गति में कमी आएगी और कई क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम हो सकती है। फिर भी मौसम विज्ञानियों को इस बात की उम्मीद है कि आईओडी के पॉजिटिव होने से स्थिति में सुधार हो सकता है।
हिंद महासागर में आईओडी की न्यूट्रल स्थिति के चलते सितंबर में इसके पॉजिटिव होने की संभावना है। यदि आईओडी पॉजिटिव होता है, तो यह हिंद महासागर से भारत की ओर अधिक नमी लाएगा, जिससे मानसून को अतिरिक्त ऊर्जा मिलेगी और एल-नीनो का नकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि भारत का मानसून केवल एल-नीनो पर निर्भर नहीं करता। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र, मानसूनी ट्रफ की स्थिति और हिंद महासागर की अन्य परिस्थितियां भी वर्षा की मात्रा और वितरण को प्रभावित करती हैं। कई बार मजबूत एल-नीनो के दौरान भी देश के कुछ हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा हो जाती है। लेकिन यदि सितंबर तक आईओडी पॉजिटिव नहीं हुआ, तो एल-नीनो का दबाव और बढ़ सकता है, जिससे मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रहने का खतरा बढ़ जाएगा।



















