Apple Farmers in Kashmir: सेब से लदे पेड़ फिर भी कंगाली का डर!

श्रीनगर। दक्षिण कश्मीर के सेब उत्पादक इस समय एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। इस वर्ष अच्छी फसल की उम्मीद के बावजूद, बागों में फलों की छंटाई ठीक से न होने के
श्रीनगर। दक्षिण कश्मीर के सेब उत्पादक इस समय एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। इस वर्ष अच्छी फसल की उम्मीद के बावजूद, बागों में फलों की छंटाई ठीक से न होने के कारण फलों का आकार अपेक्षाकृत छोटा रह गया है। इससे न केवल फलों की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, बल्कि बाजार में मिलने वाली कमाई भी कम हो गई है। यह समस्या विशेष रूप से उन बागों में देखी जा रही है, जहां सेब के पेड़ बहुत घने हैं। जब सही छंटाई नहीं की जाती है, तो फल एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे वे पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते हैं। फल के सही विकास के लिए प्रारंभिक चरण में ही छंटाई करना आवश्यक है।
फ्रूट मंडी शोपियां के अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ़ ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मंडियों में आ रहे फलों का आकार उम्मीद के मुताबिक नहीं है। उन्होंने बताया कि छोटे फलों की कीमत कम मिलती है, जिससे किसानों की कमाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यदि किसान बेहतर मुनाफा चाहते हैं, तो उन्हें फलों की छंटाई को सही तरीके से करना आवश्यक है। जम्मू-कश्मीर के सबसे बड़े सेब उत्पादक ज़िलों में से एक शोपियां में 20,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर सेब की खेती होती है, जो क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और हज़ारों किसान परिवारों की आजीविका का साधन है।



















