Economic Crisis: रूस का रक्षा बजट 4 गुना बढ़ा, सोने का भंडार तेजी से घटा

रूस ने पिछले 12 महीनों में सोना बेचने वाले सबसे बड़े देशों में से एक बनकर खुद को आर्थिक संकट से निपटने की कोशिश की है। 2026 में, रूस ने अपने सोने के भंडार का एक
रूस ने पिछले 12 महीनों में सोना बेचने वाले सबसे बड़े देशों में से एक बनकर खुद को आर्थिक संकट से निपटने की कोशिश की है। 2026 में, रूस ने अपने सोने के भंडार का एक बड़ा हिस्सा बेच दिया है, जिससे सरकार को बड़े घाटे को पूरा करने के लिए नकदी जुटाने में मदद मिली है।
रूस के सेंट्रल बैंक के अनुसार, जुलाई की शुरुआत में उसके सोने का भंडार 73.4 मिलियन ट्राय औंस यानी 2,282 मीट्रिक टन था। यह भंडार फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले से पहले के स्तर से भी नीचे आ गया है। इस साल की शुरुआत में सोने की कीमतें रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, लेकिन अब औसत कीमत लगभग 4,000 डालर प्रति औंस के स्तर पर आ गई है।
पीटरसन इंस्टीट्यूट फार इंटरनेशनल इकोनामिक्स की अर्थशास्त्री एलिना रिबाकोवा के अनुसार, सोने की बिक्री का मतलब है कि रूस के पास नगदी में बदलने वाली दूसरी संपत्तियां खत्म हो रही हैं। रूस का रक्षा खर्च 2021 के मुकाबले चार गुना से भी ज्यादा बढ़ चुका है, और 2025 में यह लगभग 16 ट्रिलियन रूबल (करीब 204 अरब डालर) तक पहुंच गया था।
मास्को में सलाहकार कंपनी मैक्रो-एडवाइजरी के विश्लेषक क्रिस वेफर का कहना है कि रूस का सोना बेचना एक महत्वपूर्ण घटना है, लेकिन यह घबराहट में की गई बिक्री नहीं है। रूस ने जो सोना बेचा है, वह मुख्य रूप से केंद्रीय बैंक के बजाय वित्त मंत्रालय ने अपने नेशनल वेलफेयर फंड के जरिए बेचा है।



















