Investment trends shift across generations: सोना और LIC भूल गए जेन जी! SIP और क्रिप्टो का बढ़ा क्रेज

क्या आपको याद है कि आपके दादाजी या पिताजी सैलरी आते ही सबसे पहले कहां पैसे लगाते थे? ज्यादातर मामलों में जवाब एक ही होगा - फिक्स्ड डिपॉजिट (fd), सोना या lic की
क्या आपको याद है कि आपके दादाजी या पिताजी सैलरी आते ही सबसे पहले कहां पैसे लगाते थे? ज्यादातर मामलों में जवाब एक ही होगा - फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), सोना या LIC की पॉलिसी! लेकिन आज की तारीख में जब घर के सबसे छोटे सदस्य यानी जेन-जी (Gen-Z) की पहली नौकरी लगती है, तो उसकी नजर बैंक एफडी पर नहीं बल्कि म्यूचुअल फंड SIP और क्रिप्टो पर होती है।
नेशनल सेविंग इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के अनुसार, फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरें 1981 से लेकर 1991 तक 10.50 फीसदी से लेकर 13.50 फीसदी के बीच रहीं। इसके बाद 2001 में रिटर्न का यह आंकड़ा सिंगल डिजिट में आ गया, और बैंकों का औसत रिटर्न घटकर 9.50 फीसदी पर पहुंच गया। वर्तमान में, फिक्स्ड डिपॉजिट में बैंकों द्वारा दिए जाने वाला औसत रिटर्न 5.50 फीसदी से लेकर 7 फीसदी के बीच है। इसका मतलब है कि पिछले 30 से 35 वर्षों में एफडी पर रिटर्न करीब 50 फीसदी तक कम हो चुका है।
मिलेनियल्स ने डिजिटल क्रांति की शुरुआत देखी और वे जोखिम उठाने के लिए तैयार थे। उनका लक्ष्य केवल सेविंग करना नहीं, बल्कि दौलत बनाना और फाइनेंशियल फ्रीडम हासिल करना था। इस दौर के निवेशकों ने इक्विटी म्यूचुअल फंड (SIP), डायरेक्ट स्टॉक्स, रियल एस्टेट और गोल्ड ETF/SGB में ज्यादा निवेश किया। इस पीढ़ी ने म्यूचुअल फंड की सोच को अपनाया और एसआईपी को भारत में मुख्यधारा में ला खड़ा किया।
अगर शेयर बाजार की बात करें तो निवेशकों की काफी कमाई कराई है। बीते 25 वर्षों में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। आंकड़ों के अनुसार, साल 2000 में सेंसेक्स 4000 अंकों पर था, जो अब 80 हजार अंकों के पार पहुंच गया है। सेंसेक्स ने ढाई दशकों में निवेशकों को 20 गुना से ज्यादा का रिटर्न दिया है।



















