Railway's New Freight Policy: निजी मालगाड़ियों को मिलने वाली भाड़ा छूट के नियम में बदलाव

प्रयागराज से मिली जानकारी के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने हाल ही में निजी मालगाड़ियों के लिए भाड़ा छूट के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब कंपनियों को दो प्रति
प्रयागराज से मिली जानकारी के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने हाल ही में निजी मालगाड़ियों के लिए भाड़ा छूट के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब कंपनियों को दो प्रतिशत की अतिरिक्त मालभाड़ा छूट प्राप्त करने के लिए अपनी परफॉरमेंस को हर साल रेलवे के ट्रैक पर साबित करना होगा। यह निर्णय उन व्यापारियों और उद्योगों के लिए है जो कोयला, सीमेंट, स्टील, कार-ट्रैक्टर और केमिकल्स जैसे भारी सामान का परिवहन करते हैं। रेलवे बोर्ड ने 27 जुलाई को इस संबंध में नए आदेश जारी किए हैं, जिसमें 'लिबरलाइज्ड स्पेशल फ्रेट ट्रेन ऑपरेटर' (एलएसएफटीओ) नीति में बदलाव किया गया है। इस नई नीति के तहत, हर साल 31 मार्च को कंपनियों की परफॉरमेंस की समीक्षा की जाएगी। जब बड़ी कंपनियां रेलवे के ट्रैक पर अपने विशेष डिब्बों का उपयोग करती हैं, तो उन्हें अधिक माल ढोने के लिए भाड़े में दो प्रतिशत की छूट दी जाती है।
नए नियमों के अनुसार, किसी कंपनी के वैगन रेक की माल ढोने की क्षमता यदि रेलवे के सामान्य डिब्बों की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक होती है, तभी उसे अगले एक साल के लिए 'हाई कैपेसिटी' का दर्जा मिलेगा और दो प्रतिशत छूट जारी रहेगी। यदि यह क्षमता 10 प्रतिशत से कम पाई जाती है, तो कंपनी को यह छूट नहीं मिलेगी। वर्तमान में देश में 662 से अधिक निजी मालगाड़ी रेक संचालित हैं, जिनके माध्यम से कंपनियां कोयला, लोहा, सीमेंट, चूना पत्थर, फ्लाई ऐश, स्टील के कॉइल, कारें, दोपहिया वाहन, ट्रैक्टर, उर्वरक, कास्टिक सोड़ा, पेट्रोलियम, अनाज, चीनी, खाद्य तेल और अन्य सामान का परिवहन कर रही हैं।



















