MP High Court stays ₹350 crore school uniform tender: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 350 करोड़ रुपये के स्कूल यूनिफॉर्म टेंडर पर रोक लगाई

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्रों को वितरित की जाने वाली यूनिफॉर्म के 350 करोड़ रुपये के टेंडर पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। एक्टिंग
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्रों को वितरित की जाने वाली यूनिफॉर्म के 350 करोड़ रुपये के टेंडर पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने इस मामले को सुनवाई योग्य मानते हुए फिलहाल टेंडर को अंतिम रूप देने पर रोक लगाई है। अदालत ने राज्य सरकार, मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम और अन्य संबंधित पक्षों को एक सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
यह अंतरिम आदेश जबलपुर खंडपीठ ने तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि यूनिफॉर्म खरीद के लिए अपनाई गई टेंडर प्रक्रिया मध्य प्रदेश भंडार क्रय नियम 2023 के प्रावधानों के विपरीत है। याचिकाकर्ताओं में अल्पसंख्यक पिछड़ा वर्ग पावरलूम बुनकर संघ, पैराडाइज बुनकर संघ और कोहिनूर बुनकर संघ शामिल हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 1993 से राज्य स्तरीय पावरलूम सहकारिता समिति को स्कूल यूनिफॉर्म की आपूर्ति के लिए नोडल एजेंसी का कार्य सौंपा गया है और इसी व्यवस्था के तहत काम होता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भंडार क्रय नियम के अनुसार स्कूल ड्रेस जैसी सामग्री की खरीद राज्य के उपक्रमों से बिना खुली निविदा के भी की जा सकती है। इसके बावजूद, मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम ने 3 जून 2026 को 350 करोड़ रुपये का ओपन टेंडर जारी किया, जो नियमों के अनुरूप नहीं है।
बुनकर संगठनों का दावा है कि यदि इस टेंडर को लागू किया गया तो प्रदेश के पावरलूम और स्पिनिंग मिल उद्योग से जुड़े दो लाख बुनकर परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी। उन्होंने अदालत को बताया कि अधिकांश बुनकरों ने अपने उद्योग चलाने के लिए बैंकों से ऋण लिया है। यदि उन्हें काम नहीं मिला तो आर्थिक संकट गहरा जाएगा।



















