Mental Health: क्या रोजाना फ्रूट जूस पीने से डिप्रेशन कम हो सकता है? 4 हफ्तों की रिसर्च में मिले संकेत

सुबह की शुरुआत एक गिलास ताजे फ्रूट जूस से करने पर न केवल शरीर को ऊर्जा मिलती है, बल्कि मूड में भी सुधार हो सकता है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में यह दावा किया
सुबह की शुरुआत एक गिलास ताजे फ्रूट जूस से करने पर न केवल शरीर को ऊर्जा मिलती है, बल्कि मूड में भी सुधार हो सकता है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में यह दावा किया गया है कि उचित मात्रा में फ्रूट जूस का सेवन डिप्रेशन के शुरुआती लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकता है। हालांकि, न्यूट्रिशनिस्ट और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जूस में मौजूद प्राकृतिक शुगर, एंटीऑक्सीडेंट्स और गट-ब्रेन कनेक्शन (Gut-Brain Connection) मूड को प्रभावित करते हैं, लेकिन यह डिप्रेशन का चिकित्सा उपचार नहीं है।
ब्रिटेन की Newcastle University द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि स्वस्थ आहार के साथ रोजाना एक गिलास फ्रूट जूस या स्मूदी का सेवन करने वाले व्यक्तियों में चार सप्ताह बाद डिप्रेशन के स्कोर में कमी आई। यह शोध उन वयस्कों पर किया गया, जो आमतौर पर दिन में दो या उससे कम सर्विंग फल और सब्जियां खाते थे। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को फल और सब्जियों का सेवन बढ़ाने में मदद की, ताकि वे रोजाना पांच सर्विंग तक पहुंच सकें।
अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों ने चार बार 24 घंटे की डाइटरी रिकॉल पूरी की, जिसमें उन्होंने पिछले 24 घंटे में खाए गए भोजन की जानकारी साझा की। इन रिकॉर्ड्स से पता चला कि दोनों इंटरवेंशन ग्रुप में रोजाना फाइबर का सेवन औसतन 8-10 ग्राम बढ़ा। इससे यह संकेत मिलता है कि जूस या स्मूदी को आहार में शामिल करने से लोगों ने साबुत फल और फाइबर से भरपूर सब्जियों का सेवन कम नहीं किया, बल्कि उनके कुल फल-सब्जियों और फाइबर का सेवन बढ़ा।
फ्रूट जूस में प्राकृतिक शुगर होने के कारण इसके सेवन को लेकर चिंताएं व्यक्त की जाती हैं। हालांकि, इस चार सप्ताह के अध्ययन में जूस या स्मूदी लेने वाले प्रतिभागियों में मेटाबॉलिक हेल्थ पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा गया। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि अध्ययन में केवल 42 लोग शामिल थे और इसकी अवधि केवल चार सप्ताह थी, इसलिए लंबे समय तक फ्रूट जूस के सेवन के प्रभावों के बारे में ठोस निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।



















