Emergency health facilities lag in Bihar: स्वास्थ्य सुविधाओं में फिसड्डी साबित हुआ बिहार, 2546 में से सिर्फ 225 केंद्र चालू

आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए बिहार और आंध्र प्रदेश सबसे पीछे हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एचएससी-एएएम) के तहत देशभर में 11001 केंद्र बनाए जा
आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए बिहार और आंध्र प्रदेश सबसे पीछे हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एचएससी-एएएम) के तहत देशभर में 11001 केंद्र बनाए जाने हैं, जिनमें से बिहार में 2546 केंद्र बनाए जाने हैं। इनमें से केवल 225 केंद्र कार्यशील हैं, जो कि 8.83 फीसद है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभिम) के तहत इन केंद्रों का निर्माण किया जा रहा है।
इन स्वास्थ्य केंद्रों के पास खुद का सरकारी भवन नहीं है और ये आमतौर पर किराए के मकानों, पंचायत भवनों या सामुदायिक हालों से संचालित होते हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए इन केंद्रों की स्थापना की जा रही है। आंध्र प्रदेश में कुल 696 इकाईयां बनानी हैं, जिनमें से केवल 8 (1.14 फीसद) कार्यशील हैं।
असम में 768 केंद्र बनाए जाने हैं, जिनमें से 389 (50.6 फीसद) कार्यशील हैं। झारखंड में 893 केंद्र बनाए जाने हैं, जिनमें से 744 (83 फीसद) कार्यशील हैं। कर्नाटक में 530 केंद्रों में से 375 (70 फीसद) पर काम जारी है। मणिपुर में 64 केंद्रों में से 36 (56 फीसद) कार्यशील हैं।
मेघालय में 251 केंद्र बनाए जाने हैं, जिनमें से 96 (38 फीसद) कार्यशील हैं। ओडिसा में 604 केंद्रों में से 376 (62 फीसद) कार्यशील हैं। राजस्थान में 2518 केंद्र बनाए जाने हैं, जिनमें से 948 (37.6 फीसद) कार्यशील हैं। उत्तर प्रदेश में 1670 केंद्रों में से 1416 (84.79 फीसद) कार्यशील हैं। पश्चिम बंगाल में 461 केंद्रों में से 112 (24 फीसद) कार्यशील हैं।


















