Eating Style Matters More Than What's on Your Plate: भोजन करने का सही तरीका जानें

आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में, लोगों के पास ठीक से बैठकर भोजन करने का समय नहीं है। यह स्थिति हमारी सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। अक्सर हमें लगता है कि हमन
आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में, लोगों के पास ठीक से बैठकर भोजन करने का समय नहीं है। यह स्थिति हमारी सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। अक्सर हमें लगता है कि हमने जल्दी में अपना नाश्ता, लंच और डिनर खत्म कर लिया, लेकिन यह जल्दीबाजी हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। यदि हम सही तरीके से भोजन नहीं करते हैं, तो भले ही हमारा आहार पौष्टिक हो, इसका शरीर पर सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
इस लेख का शीर्षक 'थाली में क्या है से ज्यादा जरूरी कैसे खा रहे हैं' इस बात पर जोर देता है कि खाने की समझ होना आवश्यक है। जल्दबाजी में भोजन करने से पाचन में कठिनाई होती है, जिससे पेट, किडनी और लीवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप, पौष्टिक भोजन भी शरीर को नुकसान पहुँचा सकता है। कई लोग शिकायत करते हैं कि वे पौष्टिक आहार लेते हैं, फिर भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं। इसका मुख्य कारण भोजन करने का तरीका हो सकता है।
प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु ओम स्वामी अपनी किताब 'स्वास्थ्य सिद्धि' में लिखते हैं कि खाने की कला को समझना आवश्यक है। वे कहते हैं कि क्या खाना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि कैसे खाना अधिक मायने रखता है। भोजन एक क्रिया नहीं, बल्कि एक कला, अनुशासन और विज्ञान है। ओम स्वामी के अनुसार, तीन प्रकार के खाने वाले होते हैं। पहली श्रेणी में वे लोग आते हैं जो जल्दी-जल्दी खाते हैं और शायद ही चबाते हैं। दूसरी श्रेणी में वे लोग होते हैं जो मध्यम गति से खाते हैं और अच्छी तरह चबाते हैं। तीसरी श्रेणी में वे लोग आते हैं जो बहुत धीरे-धीरे खाते हैं।
ओम स्वामी पहले प्रकार के खाने वालों की तुलना कुत्तों से करते हैं, जो जल्दी में अपना भोजन खत्म करते हैं। ऐसे लोग भोजन के दौरान चारों ओर देखते हैं, जिससे उनकी प्राकृतिक प्रवृत्ति का पता चलता है। जल्दबाजी में भोजन करने से अपच की समस्या उत्पन्न होती है। आयुर्वेद के अनुसार, भोजन को सही तरीके से चबाकर न खाना कई बीमारियों का कारण बन सकता है। ओम स्वामी के अनुसार, मानव शरीर के 95% रोग पेट से उत्पन्न होते हैं।



















