Court warns against trivializing dowry harassment complaints: बेटी की दहेज प्रताड़ना की शिकायत को हल्के में न लें, समझौते की सलाह पड़ सकती भारी: लखनऊ हाई कोर्ट

जागरण संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दहेज हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि दहेज प्रताड़ना की शिकायत लेकर बार-बार
जागरण संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दहेज हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि दहेज प्रताड़ना की शिकायत लेकर बार-बार मायके आने वाली बेटी की बात को सामान्य वैवाहिक विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ऐसी शिकायतें अक्सर गंभीर होती हैं और इन्हें हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जब कोई महिला बार-बार अपने माता-पिता के घर आती है, तो यह उसकी मदद, सुरक्षा और समय पर हस्तक्षेप की वास्तविक पुकार हो सकती है। ऐसे में परिवार की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी बनती है कि वह अपनी बेटी की बात पर विश्वास करे और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। यह न केवल एक कानूनी जिम्मेदारी है, बल्कि एक मानवीय कर्तव्य भी है।
पीठ ने श्रावस्ती के वर्ष 2011 के दहेज हत्या मामले में दोषियों की आपराधिक अपील पर फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अक्सर दहेज उत्पीड़न झेल रही महिलाओं को परिवार की ओर से समझौता कर लो या घर बचा लो जैसी सलाह दी जाती है। यह सलाह कभी-कभी अनजाने में उत्पीड़न करने वालों का मनोबल बढ़ा देती है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि समय रहते प्रभावी हस्तक्षेप किया जाए तो महिला की जान बचाई जा सकती है। यह महत्वपूर्ण है कि परिवार इस बात को समझे कि उनकी बेटी की सुरक्षा सबसे पहले आनी चाहिए और उन्हें उसकी बातों को गंभीरता से लेना चाहिए।
















