Ethanol Production from Broken Rice: एथनॉल बनाने में टूटे चावल के इस्तेमाल से महंगाई पर असर नहीं, केंद्र सरकार ने कर दिया साफ

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में स्पष्ट किया कि एथनॉल बनाने के लिए अतिरिक्त टूटे चावल का उपयोग करने से खाद्य महंगाई पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में स्पष्ट किया कि एथनॉल बनाने के लिए अतिरिक्त टूटे चावल का उपयोग करने से खाद्य महंगाई पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ रहा है। खाद्य राज्यमंत्री नीमूबेन जयंतीभाई बंभानिया ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि एथनॉल उत्पादन के लिए चावल का उपयोग तभी किया जाता है जब देश में पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद ही सरकार केंद्रीय पूल से केवल बचे हुए चावल को खुले बाजार में बेचती है। इस प्रक्रिया के तहत ही चावल का उपयोग एथनॉल बनाने के लिए किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि खाद्य सुरक्षा प्रभावित नहीं होती।
मंत्री ने आगे कहा कि एथनॉल उत्पादन के लिए मक्के को फीडस्टॉक के रूप में शामिल करने से किसानों को फसल उगाने के लिए एक स्थिर बाजार और बेहतर दाम प्राप्त करने में सहायता मिली है। यह कदम न केवल किसानों के लिए फायदेमंद है, बल्कि इससे एथनॉल उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि 2025-26 के लिए अनाज उत्पादन के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, भारत में मक्के का उत्पादन 5.5 करोड़ टन होने की संभावना है। यह उत्पादन एथनॉल उत्पादन, पोल्ट्री और मवेशियों के चारे की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
















