Court Acquits All Accused in Khargone Violence Case: खरगोन में रामनवमी पर हुई हिंसा के मामले में सभी 11 आरोपित दोषमुक्त

डिजिटल डेस्क, इंदौर। खरगोन में वर्ष 2022 में रामनवमी के अवसर पर हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में अदालत ने सभी 11 आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया है। चतुर्थ अपर स
डिजिटल डेस्क, इंदौर। खरगोन में वर्ष 2022 में रामनवमी के अवसर पर हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में अदालत ने सभी 11 आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया है। चतुर्थ अपर सत्र न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। अदालत ने गवाहों के विरोधाभासी बयान, आरोपितों की पहचान न हो पाने और वैज्ञानिक जांच में अभियोजन के दावों की पुष्टि न होने के आधार पर सभी आरोपितों को बरी कर दिया। न्यायाधीश मुकेश नाथ ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध साक्ष्य किसी भी आरोपित के विरुद्ध दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। अभियोजन के अनुसार, 10 अप्रैल 2022 को रामनवमी के अवसर पर खरगोन के भाटवाड़ी क्षेत्र में पथराव, आगजनी और हिंसा की घटनाएं हुई थीं। आरोप था कि भीड़ ने मकानों पर पथराव किया और पेट्रोल बम फेंककर घरों व वाहनों में आग लगा दी। इस मामले में पुलिस ने 11 आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर चालान पेश किया था। सुनवाई के दौरान कई अहम गवाह अदालत में आरोपितों की पहचान नहीं कर सके। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने अपने पहले दिए गए बयान से भी अदालत में पलटते हुए अभियोजन के दावों का समर्थन नहीं किया, जिसके बाद उन्हें पक्षद्रोही (होस्टाइल) घोषित किया गया। अदालत ने यह भी माना कि एक गवाह ने घटना को काफी दूर से देखने का दावा किया, जो परिस्थितियों के अनुरूप विश्वसनीय नहीं था। वहीं, एक अन्य महत्वपूर्ण गवाह का बयान घटना के 51 दिन बाद दर्ज किया गया, जिसकी देरी का संतोषजनक कारण भी अभियोजन प्रस्तुत नहीं कर सका। मामले की जांच में राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल), सागर की रिपोर्ट भी अदालत के फैसले का महत्वपूर्ण आधार बनी। घटनास्थल से जब्त कांच के टुकड़ों और राख के नमूनों की जांच में पेट्रोल, डीजल या केरोसिन जैसे किसी भी ज्वलनशील पदार्थ के अवशेष नहीं मिले। इसके चलते आगजनी में पेट्रोल बम या विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल का दावा भी अदालत में प्रमाणित नहीं हो सका। अपर लोक अभियोजक युवराज गुजराती ने बताया कि सुनवाई के दौरान अदालत ने उस साक्षी वैष्णवी जैन के साहस की सराहना भी की, जिसने घटना के दौरान दरवाजे की ओट से वीडियो रिकॉर्ड किया था और अदालत में निर्भीक होकर अपना पक्ष रखा। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि आपराधिक मामलों में अभियोजन पर आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने की जिम्मेदारी होती है। इस मामले में प्रस्तुत साक्ष्य, गवाहों के बयान और वैज्ञानिक रिपोर्ट आरोपों की पुष्टि नहीं कर सके। ऐसे में सभी 11 आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया जाता है।

















